Ranchi: डिग्रियां सिर्फ कागजों का पुलिंदा बनकर रह गई हैं या उनके बलबूते जिंदगी संवर भी सकती है? जनता दरबार से एक ऐसा ही झकझोर देने वाला और बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है, जो सिस्टम की कार्यप्रणाली और संघर्ष की एक लंबी दास्तान बयां करता है। एमए और बीएड जैसी उच्च शैक्षणिक योग्यता हासिल करने के बाद भी एक नेत्रहीन युवा रोजगार के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है।
Read more: जमीन पर कब्जे से परेशान टाना भगतों ने खटखटाया DC का दरवाजा
अपनी फरियाद लेकर सीधे जिला कलेक्टर (DC) के दरबार पहुंचे इस युवा की पीड़ा ने वहां मौजूद हर शख्स को अंदर तक झकझोर कर रख दिया।
‘साहब, योग्यता है, बस किसी नेत्रहीन विद्यालय में सेवा का मौका दे दीजिए’
जनता दरबार में अपनी फरियाद लेकर पहुंचे नेत्रहीन युवा दशरथ मंडल के हौसले भले ही बुलंद हों, लेकिन सिस्टम की उदासीनता ने उनके सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। DC के समक्ष पेश होकर दशरथ मंडल ने दो टूक शब्दों में अपनी अपील रखी। उन्होंने प्रशासन से गुहार लगाई कि उन्हें किसी नेत्रहीन विद्यालय में शिक्षक के रूप में अपनी सेवाएं देने का अवसर उपलब्ध कराया जाए।
दशरथ ने दर्द बयां करते हुए प्रशासन को बताया कि इतनी उच्च शिक्षा हासिल करने के बाद भी आज तक उन्हें रोजगार का कोई उचित और स्थायी मंच नहीं मिल पाया है। उन्होंने साफ कहा कि वे किसी के आगे हाथ नहीं फैलाना चाहते, बल्कि अपनी काबीलियत और योग्यता के दम पर अपने पैरों पर खड़े होना चाहते हैं।







