New Delhi: HIV संक्रमण के उच्च जोखिम वाले लोगों के लिए मेडिकल साइंस ने बचाव का एक नया और अधिक प्रभावी विकल्प पेश किया है। हालिया वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार, HIV से बचाव के लिए रोजाना ली जाने वाली प्री-एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस (PrEP) गोली की तुलना में हर आठ सप्ताह में एक बार दिया जाने वाला इंजेक्शन कहीं अधिक कारगर साबित हुआ है। ‘कैबोटेग्राविर’ (Cabotegravir) नाम का यह लॉन्ग-एक्टिंग इंजेक्शन उन लोगों के लिए सुरक्षा कवच का काम करता है, जो संक्रमित नहीं हैं लेकिन जिनके संक्रमित होने का जोखिम अधिक रहता है।
4,566 लोगों पर हुआ ट्रायल, आंकड़ों ने साबित किया दम
इस इंजेक्शन की प्रभावशीलता जांचने के लिए बड़े पैमाने पर क्लिनिकल ट्रायल किया गया, जिसमें 4,566 लोगों को शामिल किया गया था। प्रतिभागियों को दो समूहों में बांटा गया—एक समूह को हर आठ सप्ताह में कैबोटेग्राविर का इंजेक्शन दिया गया, जबकि दूसरे समूह को रोज ली जाने वाली प्रिवेंशन गोली दी गई। अध्ययन के अंत में इंजेक्शन लेने वाले समूह में केवल 13 लोग संक्रमित पाए गए, जबकि रोजाना गोली लेने वाले समूह में 39 लोगों में संक्रमण दर्ज हुआ। रोजाना की भागदौड़ में अक्सर लोग दवा की खुराक लेना भूल जाते हैं, जबकि यह इंजेक्शन दो महीने तक शरीर में सक्रिय रहकर सुरक्षा देता है।
महिलाओं पर किए गए अध्ययन में दिखे शानदार नतीजे
महिलाओं पर किए गए एक अलग और विस्तृत अध्ययन में भी इस इंजेक्शन के नतीजे बेहद सकारात्मक रहे। कुल 3,224 महिलाओं पर किए गए इस शोध में पाया गया कि हर आठ सप्ताह में इंजेक्शन लेने वाले समूह में HIV संक्रमण के केवल 4 मामले सामने आए। इसके उलट, रोजाना नियमित रूप से गोली लेने वाले समूह में 36 महिलाएं HIV पॉजिटिव पाई गईं। इन आंकड़ों से साफ है कि महिलाओं में संक्रमण के खतरे को टालने में यह इंजेक्शन दैनिक दवाओं की तुलना में कई गुना बेहतर सुरक्षा प्रदान करता है।
इलाज नहीं, सिर्फ बचाव; टेस्ट कराना अनिवार्य
विशेषज्ञों ने साफ किया है कि कैबोटेग्राविर HIV का इलाज (Cure) नहीं है, बल्कि यह केवल संक्रमण से बचाव (Prevention) का एक माध्यम है। जो लोग पहले से HIV संक्रमित हैं, उनके उपचार के लिए अलग एंटीरेट्रोवाइरल दवाओं की जरूरत होती है। किसी भी व्यक्ति को यह इंजेक्शन देने से पहले चिकित्सकीय परामर्श और HIV टेस्ट अनिवार्य है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वह पहले से संक्रमित नहीं है। साथ ही, इसका पूरा फायदा तभी मिलता है जब हर आठ सप्ताह पर इसकी अगली खुराक समय पर ली जाए।




