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झारखंड SIR: 63 लाख वोटरों के घर पहुंचेंगे BLO, तैयार रखें दस्तावेज

झारखंड में एसआईआर (SIR) प्रक्रिया के तहत बीएलओ ने 63.24 लाख नोटिस प्राप्त मतदाताओं का घर-घर सत्यापन शुरू कर दिया है। 14 अक्टूबर तक आपत्तियों के निपटारे के बाद 19 अक्टूबर को अंतिम मतदाता सूची जारी होगी।

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Ranchi: झारखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया अपने अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव में पहुंच गई है। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय के निर्देश पर गुरुवार से बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) राज्य के 63.24 लाख से अधिक मतदाताओं के घर-घर जाकर उनकी पात्रता से जुड़े जरूरी दस्तावेज जुटाने के अभियान में जुट गए हैं।

यह फील्ड वेरिफिकेशन उन मतदाताओं का किया जा रहा है, जिन्हें पुराने रिकॉर्ड से मैपिंग न होने, तार्किक विसंगतियों या समान जनसांख्यिकीय विवरण (सिमिलर डेमोग्राफिक डेटा) के आधार पर पूर्व में नोटिस जारी किए गए थे। बीएलओ द्वारा संग्रहित सभी दस्तावेजों को सीधे चुनाव आयोग के पोर्टल पर अपलोड किया जा रहा है।

14 अक्टूबर तक आपत्तियों का निपटारा, 19 को फाइनल लिस्ट

SIR के तहत दावा और आपत्ति दर्ज कराने की मियाद 30 सितंबर को पूरी हो चुकी है। इस दौरान मतदाता सूची में नाम जोड़ने, विलोपित करने या त्रुटि सुधार के लिए बड़ी संख्या में फॉर्म जमा हुए हैं। निर्वाचन तंत्र ने अब इन सभी आवेदनों और आपत्तियों के डिजिटाइजेशन, स्क्रूटनी, जरूरत पड़ने पर नोटिस जारी करने और सुनवाई का काम तेज कर दिया है। अधिकारियों को हर हाल में 14 अक्टूबर तक सभी मामलों की जांच पूरी कर अंतिम निर्णय लेना होगा, ताकि 19 अक्टूबर को राज्य की अंतिम मतदाता सूची का विधिवत प्रकाशन किया जा सके।

60 दिन के अतिरिक्त समय की मांग नहीं हुई स्वीकार

इस व्यापक अभियान को त्रुटिरहित पूरा करने के लिए राज्य निर्वाचन कार्यालय ने भारत निर्वाचन आयोग से 60 दिनों की अतिरिक्त मोहलत मांगी थी। हालांकि, आयोग की ओर से इस अनुरोध पर कोई मंजूरी नहीं मिली है। ऐसे में राज्य में तय समय-सारिणी के तहत ही काम आगे बढ़ाया जा रहा है। महज दो हफ्तों के भीतर 63 लाख से अधिक नोटिसों के सत्यापन और लाखों दावा-आपत्तियों का निस्तारण करना चुनावी मशीनरी के लिए प्रशासनिक स्तर पर बड़ी चुनौती बना हुआ है।

पोर्टल पर अपलोडिंग के बाद ईआरओ लेंगे अंतिम फैसला

सत्यापन प्रक्रिया के दौरान बीएलओ मतदाताओं से जरूरी साक्ष्य लेकर आयोग के पोर्टल पर डिजिटल रूप से दर्ज करेंगे। इसके बाद संबंधित निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी (ईआरओ) प्रत्येक मामले में अपलोड किए गए दस्तावेजों की समीक्षा करेंगे। यदि किसी मतदाता के कागजात में कोई संदेह रहता है, तो नियमानुसार संक्षिप्त सुनवाई कर निर्णय लिया जाएगा। निर्वाचन विभाग का पूरा जोर तय समय में पारदर्शी जांच पूरी करने पर है, ताकि किसी भी पात्र नागरिक का नाम सूची से बाहर न रहे।

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