Riyadh, Saudi Arabia: यमन के हूती विद्रोहियों के साथ लगातार तेज होते सैन्य संघर्ष के बीच सऊदी अरब के सामने एक अप्रत्याशित रक्षा संकट खड़ा हो गया है। हूती लड़ाकों की ओर से दागी जा रही बैलिस्टिक मिसाइलों और सुसाइड ड्रोनों को हवा में ही नष्ट करने वाले एयर डिफेंस इंटरसेप्टर का भंडार तेजी से खाली हो रहा है। जानकारों का कहना है कि युद्धग्रस्त यूक्रेन की तरह ही अब सऊदी अरब के पास भी एयर डिफेंस की कमी हो गई है, जिससे उसके प्रमुख शहरों और बुनियादी ढांचे पर सीधा खतरा मंडरा रहा है।
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चार देशों से मदद की गुहार, तेल ढांचे पर सीधा खतरा
क्षेत्रीय राजनयिक सूत्रों के अनुसार, इंटरसेप्टर मिसाइलों की किल्लत को देखते हुए सऊदी अरब ने फ्रांस, ब्रिटेन, पाकिस्तान और मिस्र से आपातकालीन एयर डिफेंस सहायता उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है। सऊदी प्रशासन की चिंता सिर्फ सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं है, बल्कि उसे अपनी प्रमुख सरकारी इमारतों, रिहायशी इलाकों और वैश्विक अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले तेल शोधन संयंत्रों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करनी है। हूती विद्रोही लगातार मिसाइल और ड्रोन हमलों के जरिए सऊदी अरब पर दबाव बना रहे हैं, साथ ही लाल सागर के समुद्री मार्ग पर भी उनकी गतिविधियां तेज हो चुकी हैं।
अमेरिका का अपना भंडार खाली, मदद देने में असमर्थ
सऊदी अरब के लिए सबसे बड़ा झटका उसका पारंपरिक और सबसे बड़ा सुरक्षा साझीदार अमेरिका साबित हो रहा है। पिछले छह महीनों से ईरान और उसके सहयोगी गुटों के साथ जारी व्यापक तनाव और इजराइल की सुरक्षा में लगे रहने के कारण खुद अमेरिका के इंटरसेप्टर मिसाइलों के भंडार में भारी गिरावट आई है। इसके अलावा, यूक्रेन को लगातार सैन्य मदद भेजने के कारण पेंटागन के पास अतिरिक्त एयर डिफेंस सिस्टम उपलब्ध नहीं हैं। दशकों से अमेरिकी रक्षा छतरी पर निर्भर रहे सऊदी अरब के लिए वाशिंगटन की यह लाचारी चिंता का सबब बन गई है।
मक्का को बनाया गया निशाना, तेल 100 डॉलर के पार
हाल ही में सऊदी अरब ने हूतियों पर इस्लाम के सबसे पवित्र स्थल मक्का की दिशा में ड्रोन दागने का गंभीर आरोप लगाया है। हालांकि, सऊदी सुरक्षा बलों ने दावा किया कि ड्रोन को आसमान में ही मार गिराया गया, जबकि हूतियों ने इस आरोप को सिरे से खारिज कर दिया है। सऊदी नेतृत्व ने स्पष्ट किया है कि मक्का पर किसी भी तरह की आंच बर्दाश्त नहीं की जाएगी और यह उसकी अंतिम ‘रेड लाइन’ है।
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दूसरी ओर, बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य के आसपास कई अहम द्वीपों पर हूतियों की मजबूत होती पकड़ और होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। ब्रिटेन ने जहां सऊदी के साथ अपनी रणनीतिक रक्षा साझेदारी की पुष्टि की है, वहीं पाकिस्तान और तुर्की ने कहा है कि उन्हें ताजा हमलों के मद्देनजर अभी औपचारिक सैन्य सहायता का अनुरोध प्राप्त नहीं हुआ है।




