रांची: झारखंड सरकार के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग (झारखंड राज्य मध्याह्न भोजन प्राधिकरण) ने राज्य के सरकारी और सहायता प्राप्त विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक फैसला लिया है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के तहत ‘पीएम पोषण योजना’ के अंतर्गत अतिरिक्त पोषाहार (अंडा और फल) मद में राज्य के सभी 24 जिलों के लिए कुल ₹78,67,29,510 (अठहत्तर करोड़ सरसठ लाख उनतीस हजार पांच सौ दस रुपये) की राशि आवंटित कर दी गई है।
प्राधिकरण की निदेशक समीरा एस. (भा.प्र.से.) द्वारा जारी आदेश के अनुसार, यह राशि जुलाई 2026 से दिसंबर 2026 तक के कुल 45 कार्य दिवसों (PAB स्वीकृत छात्र संख्या के आधार पर) के लिए जारी की गई है।
जिलों को फंड आवंटन और दिशा-निर्देश
जारी आदेश पत्र के तहत सभी जिलों के उपायुक्त-सह-अध्यक्ष (स्टीयरिंग सह मॉनिटरिंग कमेटी) और जिला शिक्षा अधीक्षकों (DSE) को निर्देश दिए गए हैं कि वे इस राशि को तुरंत विद्यालयों तक पहुँचाना सुनिश्चित करें। आदेश में कहा गया है कि जिला शिक्षा अधीक्षक स्कूलों की अधिकतम औसत उपस्थिति और पुराने अवशेष राशि का समायोजन (Adjustment) करते हुए 3 दिनों के भीतर ‘PFMS Scheme JH-210’ के माध्यम से सीधे विद्यालयों के बैंक खातों (Vendor Account) में फंड ट्रांसफर करें।
प्रधानाध्यापकों की होगी सीधी जवाबदेही
योजना के पारदर्शी संचालन के लिए विद्यालय के प्रधानाध्यापक-सह-सदस्य सचिव को मुख्य रूप से जिम्मेदार बनाया गया है। राशि प्राप्त होते ही उन्हें वास्तविक लाभार्थी छात्र-छात्राओं को सप्ताह में अनिवार्य रूप से दो दिन अंडा या फल का वितरण सुनिश्चित कराना होगा।
केंद्र राशि के अभाव में विशेष व्यवस्था
विभाग ने पत्र में यह स्पष्ट किया है कि वर्तमान में केंद्र सरकार से मध्याह्न भोजन के लिए केन्द्रांश-राज्यांश की राशि प्राप्त नहीं हुई है। ऐसे में भोजन संचालन में व्यवधान न आए, इसके लिए अंडा/फल मद की इस राशि का उपयोग अस्थायी रूप से ‘मटीरियल कॉस्ट’ (राशन सामग्री) के लिए किया जा सकता है। जैसे ही केन्द्रांश की राशि प्राप्त होगी, अंडा/फल मद की राशि को पुनः समायोजित कर लिया जाएगा। प्रत्येक विद्यालय को Meal Served के आधार पर अलग-अलग मदवार लेखा-जोखा रखना होगा तथा पत्र प्राप्ति के 15 दिनों के भीतर उपयोगिता प्रमाण पत्र (UC) जमा करना अनिवार्य होगा।





