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फुसरो के सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में देशभक्ति के साथ मनाया गया विजय दिवस

Bokaro News: अनपति देवी सरस्वती शिशु विद्या मंदिर फुसरो में मंगलवार को 1971 के युद्ध में पाकिस्तान पर भारत के जीत को लेकर विद्यालय में विजय दिवस मनाया गया ।कार्यक्रम का शुरुआत मुख्य अतिथि 1965 एंव 1971 के युद्ध में शामिल सैनिक शिवनाथ मिश्रा ,विद्यालय

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Bokaro News: अनपति देवी सरस्वती शिशु विद्या मंदिर फुसरो में मंगलवार को 1971 के युद्ध में पाकिस्तान पर भारत के जीत को लेकर विद्यालय में विजय दिवस मनाया गया ।कार्यक्रम का शुरुआत मुख्य अतिथि 1965 एंव 1971 के युद्ध में शामिल सैनिक शिवनाथ मिश्रा ,विद्यालय के प्रधानाचार्य पंकज कुमार मिश्रा,विद्यालय के सचिव अमित कुमार सिंह के द्वारा भारत माता के चित्र के समक्ष द्वीप प्रज्ज्वलित कर किया गया ।जिसमें विद्यालय के प्रधानाचार्य ने कहा विजय दिवस 16 दिसम्बर को 1971 के युद्ध में पाकिस्तान पर भारत की जीत के कारण मनाया जाता है। इस युद्ध के अंत के बाद 93,000 पाकिस्तानी सेना नेआत्मसमर्पण कर दिया था। साल 1971 के युद्ध में भारत और बांग्लादेश की संयुक्त सेना ने पाकिस्तान को पराजित किया, जिसके बाद पूर्वी पाकिस्तान स्वतंत्र हो गया, जो आज बांग्लादेश के नाम से जाना जाता है। यह युद्ध भारत के लिए एतिहासिक और हर देशवासी के हृदय में उमंग पैदा करने वाला साबित हुआ।इसी क्रम में मुख्य अतिथि शिवनाथ मिश्रा जी ने कहा यह दिन 1971 की विजय का स्मरण कराता है और सैनिकों, नाविकों तथा वायुसेना के जवानों के साहस, दक्षता और अटूट समर्पण का प्रतीक है इस ऐतिहासिक उपलब्धि का स्मरण करते हुए हम उन वीर शहीदों को गहन श्रद्धा के साथ नमन करते हैं, जिन्होंने कर्तव्य पथ पर अपने प्राणों की आहुति दी 1971 के सिद्धांतों से प्रेरित होकर संयुक्तता मजबूत करने, स्वदेशी तकनीक अपनाने और परिचालन तत्परता बढ़ाने पर जोर देना चाहिए़ उन्होंने पहले भारत माता फिर अपनी माता होती है| अंत में विद्यालय के सचिव अमित कुमार सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन किया और उन्होंने कहा भारत भूमि, जो आदिकाल से वीरों की जननी रही है, उसकी सुरक्षा और अखंडता की जिम्मेदारी जिन कंधों पर है, वे हैं हमारी भारतीय सेना के जांबाज जवान। भारतीय सेना केवल एक सैन्य संगठन नहीं, बल्कि यह भारत के शौर्य, साहस, बलिदान और अटूट राष्ट्रनिष्ठा का जीवंत प्रतीक है। यह वह शक्ति है जो हमारी सीमाओं की रक्षा करती है, आपदाओं में राहत पहुँचाती है और विश्व शांति में भी अपना अमूल्य योगदान देती है। भारतीय सेना का पराक्रम केवल युद्ध के मैदान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश के हर संकट में जनता के साथ खड़ी रहने वाली एक ढाल है। भारत की सैन्य शक्ति मुख्य रूप से तीन गौरवशाली अंगों में विभाजित है: भारतीय थल सेना (Indian Army), भारतीय वायु सेना (Indian Air Force) और भारतीय जल सेना (Indian Navy)। ये तीनों ही भुजाएँ मिलकर भारत की सुरक्षा को अभेद्य बनाती हैं। कार्यक्रम को सफल बनाने में सभी आचार्य दीदी और कर्मचारी बंधु भगिनी का संपूर्ण योगदान रहा|

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