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ट्रंप ने ईरान को दिया 60 दिनों का वक्त, उधर ईरान ने भी दिखाई अपनी ताकत

World News: अमेरिका अपने सैन्य संसाधनों को ईरान के करीब ला रहा है, जिसके बाद तेहरान ने वॉशिंगटन को चेतावनी दी है। ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद-बकर क़ालिबाफ ने अंतर्राष्ट्रीय कुद्स दिवस पर तेहरान यूनिवर्सिटी में भाषण देते हुए अमेरिका को चेतावनी दी। मोहम्मद-बकर क़ालिबाफ

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World News: अमेरिका अपने सैन्य संसाधनों को ईरान के करीब ला रहा है, जिसके बाद तेहरान ने वॉशिंगटन को चेतावनी दी है। ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद-बकर क़ालिबाफ ने अंतर्राष्ट्रीय कुद्स दिवस पर तेहरान यूनिवर्सिटी में भाषण देते हुए अमेरिका को चेतावनी दी। मोहम्मद-बकर क़ालिबाफ ने कहा कि अगर वे इस्लामी ईरान को धमकाते हैं, तो क्षेत्र में अमेरिका के सहयोगी और अमेरिकी ठिकाने बारूद के ढेर की तरह असुरक्षित हो जाएंगे।

हाल की रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका ने कम से कम चार बी-2 बमवर्षक विमान भारतीय महासागर में डिएगो गार्सिया भेजे हैं। संसद अध्यक्ष मोहम्मद-बाकर क़ालिबाफ ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान को लिखे पत्र का भी उल्लेख किया और कहा, अमेरिका का पत्र में रवैया एक धमकाने वाले का है… लेकिन आप न तो ईरानी राष्ट्र को धमका सकते हैं और न ही धोखा दे सकते हैं। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने भी अमेरिका के साथ सीधे बातचीत के खिलाफ चेतावनी दी है। ऐसा लगता है कि ईरानी राष्ट्रपति और विदेश मंत्री बातचीत के लिए अधिक बेचैन हैं। क़लीबाफ ने अमेरिकी धमकियों को युद्ध के कारण के रूप में बताया। रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप ने ईरानियों को लगभग 60 दिनों का समय दिया है निर्णय लेने के लिए। इसका मतलब है कि उन्हें मई के अंत तक निर्णय लेना होगा।क़लीबाफ ने इज़रायल की भी आलोचना की। उन्होंने कहा, साम्राज्यवादी व्यवस्था ने मानवता को दबाकर जीवित रही है, और ज़ायोनी शासन वास्तव में अपराधी अमेरिका की हत्या मशीन है।

यह स्पष्ट रूप से इराक, खाड़ी और शायद सीरिया में अमेरिकी बलों के लिए एक धमकी है। अमेरिका के कुवैत, कतर, बहरीन और यूएई में ठिकाने हैं। अमेरिका के पास इराक में असद बेस और उत्तरी इराक और पूर्वी सीरिया में कई पोस्ट हैं। ईरानी राज्य मीडिया की रिपोर्ट में कहा गया, संसद अध्यक्ष मोहम्मद-बाकर क़ालिबाफ कहते हैं कि अगर अमेरिका ईरान के खिलाफ सैन्य धमकियों को अंजाम देता है, तो क्षेत्र में अमेरिकी सहयोगी और अमेरिकी सैन्य ठिकाने असुरक्षित हो जाएंगे। यह स्पष्ट रूप से यह भी संकेत देता है कि ईरान इज़रायल या खाड़ी देशों पर हमले का जवाब दे सकता है।

क़लीबाफ को हिज़्बुल्लाह के खिलाफ इज़रायल के अभियान के दौरान समर्थन दिखाने के लिए बेरूत जाने के लिए जाना जाता है। उन्होंने शुक्रवार को कहा, अमेरिकी समर्थन के बिना इज़रायल एक हफ्ते भी जीवित नहीं रह पाता। ईरान रमजान के आखिरी शुक्रवार को कुद्स दिवस के रूप में मनाता है, ताकि लोग इज़रायल के खिलाफ प्रदर्शन करें और नफरत फैलाएं।

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