Spiritual Desk: राजस्थान के नाथद्वारा स्थित भगवान श्रीनाथजी का मंदिर अपनी धार्मिक परंपराओं और मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है। यहां भगवान श्रीनाथजी के दर्शन से जुड़ी एक खास मान्यता है, जिसके तहत श्रद्धालु अपने साथ चावल के दाने लेकर मंदिर पहुंचते हैं। मान्यता के अनुसार, दर्शन के बाद इन चावलों को घर की तिजोरी में रखने से धन की कमी नहीं होती।
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भगवान श्रीनाथजी को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, जब भगवान श्रीकृष्ण सात वर्ष के थे, तब वह यहां विराजमान हुए थे। मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण की काले रंग की मूर्ति पत्थर से तराशी गई है।
चौपासनी गांव से जुड़ा है इतिहास
मान्यता के अनुसार, एक समय श्रीनाथजी की मूर्ति जोधपुर के पास स्थित चौपासनी गांव में थी। वहां लंबे समय तक बैलगाड़ी में श्रीनाथजी की मूर्ति की पूजा की जाती रही। अब चौपासनी गांव जोधपुर का हिस्सा है। जिस स्थान पर वह बैलगाड़ी खड़ी हुई थी, वहां अब श्रीनाथजी का मंदिर बना हुआ है।
चरण चौकी में रखी हैं चरण पादुकाएं
कोटा से करीब 10 किलोमीटर दूर श्रीनाथजी की चरण पादुकाएं भी रखी हुई हैं। मान्यता के अनुसार, ये उसी समय से वहां मौजूद हैं। इस स्थान को चरण चौकी के नाम से जाना जाता है।
मौसम के अनुसार होती है प्रभु की सेवा
मंदिर से जुड़ी परंपराओं के अनुसार, सर्दियों में प्रभु श्रीनाथजी को उठाकर भोग लगाया जाता है। रात में प्रभु को शयन कराने के लिए कवियों के पदों का गान किया जाता है। श्रीनाथजी के शयन के बाद तक बीन बजाने की परंपरा भी बताई गई है।
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गर्मी में पंखे की सेवा, सर्दी में अंगीठी
गर्मी के मौसम में भगवान श्रीनाथजी के लिए पंखे की सेवा की जाती है। वहीं सर्दियों में ठंड से बचाने के लिए श्रीनाथजी की मूर्ति के पास अंगीठी रखी जाती है। मंदिर की ये परंपराएं श्रद्धालुओं के बीच विशेष आस्था का विषय हैं।




