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तेली समाज की नई उड़ान: शैक्षणिक, सांस्कृतिक और आर्थिक उत्थान की राह पर बढ़ा कदम

हरिनाथ साहू के नेतृत्व में एकजुट होकर समाज दे रहा समरसता का संदेश

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Ranchi: झारखंड की राजधानी रांची में सामाजिक समरसता, अधिकार और चहुंमुखी विकास का एक नया अध्याय लिखा जा रहा है। तेली समाज के शीर्ष नेता और सामाजिक अगुवा हरिनाथ साहू के सशक्त व दूरदर्शी नेतृत्व में समाज आज प्रतिदिन प्रगति की नई इबारत लिख रहा है। उनके कुशल मार्गदर्शन में समाज का शैक्षणिक, मानसिक, सांस्कृतिक और आर्थिक उत्थान अभूतपूर्व गति से हो रहा है।
गणेश चतुर्थी के पावन पर्व के अवसर पर रांची में ‘विश्व तेली दिवस’ का आयोजन अत्यंत भव्य और गरिमामयी वातावरण में किया गया। इस खास मौके पर समाज के लोगों ने एकजुट होकर अपनी ताकत और सामाजिक चेतना का परिचय दिया। कार्यक्रम का शंखनाद मोरहाबादी स्थित बापू वाटिका से हुआ, जहाँ से एक विशाल ‘जनजागरूकता रैली’ निकाली गई।
हाथों में एकता का संदेश लिए हजारों लोगों ने बापू वाटिका में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद प्रेस क्लब सभागार की ओर रुख किया। इस रैली की खास बात यह रही कि समाज के प्रतिनिधियों ने न केवल स्वयं अपितु संपूर्ण सर्व-समाज को आपसी भाईचारे, समरसता और सामूहिक उत्थान का मूलमंत्र साझा किया। रैली का उद्देश्य केवल एक वर्ग को आगे बढ़ाना नहीं, बल्कि पूरे झारखंड में सामाजिक सद्भाव और बराबरी का माहौल कायम करना था।
प्रेस क्लब सभागार में आयोजित मुख्य समारोह के दौरान समाज के युवाओं से लेकर वरिष्ठ, अनुभवी और बुजुर्ग पीढ़ी का अद्भुत संगम देखने को मिला। सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि तेली समाज का यह चहुंमुखी बदलाव हरिनाथ साहू की दूरगामी सोच और कार्यशैली का ही परिणाम है।
श्री साहू का कार्य केवल मंचों तक सीमित नहीं है, बल्कि वे प्रतिदिन धरातल पर उतरकर समाज के युवा वर्ग और अनुभवी बुजुर्गों के साथ सीधा संवाद स्थापित करते हैं। युवाओं के नए विचारों और बुजुर्गों के तजुर्बे को एक साथ मिलाकर वे समाज की बेहतरी के लिए ठोस योजनाएं तैयार करते हैं। इतना ही नहीं, योजनाओं के केवल कागजों पर सिमटने के बजाय वे स्वयं धरातल पर उनके शत-प्रतिशत क्रियान्वयन की निगरानी भी करते हैं।
क्षेत्रीय और स्थानीय स्तर पर आम जनता को आने वाली दिन-प्रतिदिन की समस्याओं को भी उनके नेतृत्व में त्वरित समाधान मिल रहा है। चाहे वह बच्चों की उच्च शिक्षा में आ रही बाधाएं हों, युवाओं के लिए स्वरोजगार और व्यापार के अवसर गढ़ना हो, या फिर सांस्कृतिक और सामाजिक परंपराओं का संरक्षण हो; हरिनाथ साहू की टीम स्थानीय स्तर पर समस्याओं को सुलझाने के लिए हमेशा मुस्तैद रहती है।
समारोह में सर्वसम्मति से यह बात रेखांकित की गई कि कोई भी समाज केवल आर्थिक रूप से समृद्ध होकर आगे नहीं बढ़ सकता; उसके लिए शैक्षणिक क्रांति, मानसिक जागृति और राजनीतिक व प्रशासनिक सहभागिता बेहद जरूरी है।
विश्व तेली दिवस के इस ऐतिहासिक अवसर पर समाज के लोगों ने हरिनाथ साहू के मार्गदर्शन पर पूर्ण विश्वास व्यक्त करते हुए आने वाले समय में शैक्षणिक संस्थानों के निर्माण, कमजोर परिवारों को सहायता और युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए प्रशिक्षित करने का सामूहिक संकल्प लिया। प्रेस क्लब में गूंजे इस समरसता के संदेश ने पूरे राज्य में तेली समाज की मजबूत और नई पहचान को एक बार फिर स्थापित कर दिया है।
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