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सुप्रीम कोर्ट में महिला ने जजों को कहा ‘You Guys’, सन्न रह गए वकील; फिर जो हुआ…

India News: कभी कभी ऐसे कई मौके आ जाते हैं जो अकल्पनीय होते हैं। ऐसा ही एक मौका सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों पर हो रही सुनवाई के दौरान देखा गया। जहां एक महिला ने बड़ी ही सहजता से जजों को यू गाइस (You Guys)

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India News: कभी कभी ऐसे कई मौके आ जाते हैं जो अकल्पनीय होते हैं। ऐसा ही एक मौका सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों पर हो रही सुनवाई के दौरान देखा गया। जहां एक महिला ने बड़ी ही सहजता से जजों को यू गाइस (You Guys) कह दिया। जब वकीलों ने महिला को प्रोटोकाल याद दिलाया तो उसने कहा- मुझे इसकी जानकारी नहीं थी। इसके लिए माफी चाहती हूं, तब जज ने मुस्कुराकर कहा कोई बात नहीं। मामले की गंभीरता और इस पर अदालत के हस्तक्षेप के लिए पीठ का आभार जताते हुए एक महिला भावुक हो गईं।

क्या जजों ने शिष्टाचार के उल्लंघन पर नाराजगी जताई?

उच्चतम न्यायालय में बुधवार को आवारा कुत्तों की समस्या जैसे गंभीर विषय पर सुनवाई के दौरान एक बेहद मानवीय और दिलचस्प वाकया आया। जस्टिस विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ के समक्ष इस मुद्दे पर विभिन्न पक्ष अपनी दलीलें और सुझाव रख रहे थे। इसी दौरान एक महिला ने अनजाने में अदालत के सदियों पुराने कड़े प्रोटोकॉल को तोड़ दिया, जिसे जजों ने बहुत ही उदारता और सहजता से स्वीकार किया। मामले की गंभीरता और इस पर अदालत के हस्तक्षेप के लिए पीठ का आभार जताते हुए एक महिला भावुक हो गईं। अपनी बात रखते हुए उन्होंने औपचारिक संबोधन के बजाय अनजाने में बेंच को यू गाइस (You Guys) (आप लोग) कहकर संबोधित कर दिया। अदालत की गरिमा और तय मर्यादा के अनुसार, जजों को केवल मिलॉर्ड, योर लॉर्डशिप या योर ऑनर जैसे शब्दों से ही संबोधित किया जाता है। महिला के मुंह से आम बोलचाल वाले शब्द सुनते ही वहां मौजूद वरिष्ठ वकील और अन्य लोग हैरान रह गए।

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वकीलों ने तुरंत महिला को टोकते हुए उन्हें कोर्ट रूम के तय शिष्टाचार की याद दिलाई। अपनी भूल का एहसास होते ही महिला असहज हो गईं और तुरंत माफी मांगते हुए कहा कि उन्हें अदालती नियमों की विस्तृत जानकारी नहीं थी। इस स्थिति को बिगड़ते देख जस्टिस विक्रम नाथ ने बेहद शालीनता का परिचय दिया। उन्होंने मुस्कुराते हुए महिला को सांत्वना दी और कहा, कोई बात नहीं, यह बिल्कुल ठीक है। उन्होंने औपचारिकता में उलझने के बजाय महिला को अपनी बात जारी रखने को कहा और कार्यवाही को आगे बढ़ाया। सुप्रीम कोर्ट में आमतौर पर प्रोटोकॉल को लेकर बहुत सख्ती बरती जाती है, लेकिन जस्टिस विक्रम नाथ के इस व्यवहार की कानून के गलियारों में काफी सराहना हो रही है। इस घटना ने संदेश दिया कि न्याय की सर्वोच्च दहलीज पर शब्दों की तकनीकी बारीकियों और अंग्रेजी कालीन परंपराओं से कहीं अधिक महत्वपूर्ण आम नागरिक की पीड़ा और उसकी बात को सुनना है।

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