Ranchi: देशभर में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर छिड़े सियासी और सामाजिक विवाद के बीच झारखंड प्रदेश मोमिन कॉन्फ्रेंस ने निर्वाचन आयोग के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार किया है। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष आबिद अली ने एसआईआर प्रक्रिया को तुरंत रद्द करने तथा मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है। उन्होंने स्पष्ट लहजे में कहा कि लोकतंत्र की रक्षा तभी संभव है जब हर पात्र नागरिक के मताधिकार की गारंटी हो।
आबिद अली ने प्रेस बयान जारी कर कहा कि मतदाता सूची के शुद्धिकरण के नाम पर देश के कई हिस्सों से मतदाताओं के नाम काटे जाने और प्रक्रिया में विसंगतियों की शिकायतें सामने आ रही हैं। आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ऐसी स्थिति में चुनाव आयोग को तकनीकी और प्रशासनिक बहाने बनाने के बजाय नागरिकों की शिकायतों का निष्पक्ष व पारदर्शी समाधान करना चाहिए।
उन्होंने दिल्ली में एसआईआर के खिलाफ हुए शांतिपूर्ण प्रदर्शनों पर पुलिसिया कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने पर गहरी चिंता जताई। आबिद अली ने कहा कि असहमति और शांतिपूर्ण विरोध जम्हूरियत का बुनियादी हिस्सा है, इसे दमन से दबाया नहीं जा सकता।
झारखंड के संदर्भ में चिंता जताते हुए मोमिन कॉन्फ्रेंस अध्यक्ष ने कहा कि राज्य में लाखों मतदाताओं के नाम प्रारूप सूची से बाहर रखे जाने या सत्यापन और आपत्ति के दायरे में डाले जाने की खबरें बेहद चिंताजनक हैं। प्रशासनिक खामियों, कागजी जटिलताओं या सूचना के अभाव में किसी भी वैध नागरिक का नाम वोटर लिस्ट से नहीं कटना चाहिए।
उन्होंने कहा कि इस जटिल प्रक्रिया की सबसे ज्यादा मार गरीब तबके, दिहाड़ी मजदूरों, ग्रामीणों, महिलाओं, बुजुर्गों और अल्पसंख्यक समुदाय पर पड़ती है, जिनके पास दस्तावेज जुटाने के सीमित साधन होते हैं। इसलिए बिना पूरा मौका दिए किसी का नाम हटाना असंवैधानिक है।
आबिद अली ने कहा कि मताधिकार जनता का लोकतांत्रिक अधिकार है, किसी की दया या कृपा नहीं। जब तक हर पात्र मतदाता का नाम बहाल नहीं होता और निर्वाचन आयोग अपनी निष्पक्षता साबित नहीं करता, तब तक संगठन लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए अपनी आवाज पूरी मजबूती से उठाता रहेगा।




