New Delhi: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के आधिकारिक नाम और चुनाव चिह्न को लेकर छिड़े सियासी संग्राम के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। निर्वाचन आयोग द्वारा पार्टी के नाम और मूल चुनाव चिह्न पर दिए गए अंतरिम आदेश के बाद नेता ऋतब्रत बनर्जी ने तृणमूल के शीर्ष नेतृत्व पर सीधा और तीखा हमला बोला है।
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उन्होंने आयोग के फैसले को अंतरिम बताते हुए उम्मीद जताई कि आगे इस विवाद का लोकतांत्रिक समाधान निकलेगा। इसके साथ ही उन्होंने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि कोई भी राजनीतिक दल किसी की ‘प्राइवेट लिमिटेड कंपनी’ की तरह काम नहीं कर सकता और लोकतंत्र में फासीवादी रवैये के लिए कोई स्थान नहीं है।
‘चुनाव आयोग के अंतरिम फैसले का करेंगे सम्मान’
ऋतब्रत बनर्जी ने स्पष्ट किया कि उनका गुट निर्वाचन आयोग के आदेश का पूरी तरह सम्मान करता है और आयोग द्वारा जारी सभी दिशा-निर्देशों का अक्षरशः पालन करेगा। घटनाक्रम का ब्योरा देते हुए उन्होंने बताया कि उनका पक्ष 23 जून से ही आयोग के समक्ष आवश्यक कानूनी और संगठनात्मक दस्तावेज लगातार प्रस्तुत कर रहा था। इन्हीं ठोस दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर चुनाव आयोग ने फिलहाल पार्टी के पारंपरिक नाम और आरक्षित चुनाव चिह्न को फ्रीज करने की अंतरिम व्यवस्था की है। उन्होंने यह भी कहा कि स्वस्थ भारतीय लोकतंत्र में वंशवादी राजनीति और तानाशाही सोच को बढ़ावा नहीं मिलना चाहिए।
6 अक्टूबर को नंदीग्राम और रेजीनगर में उपचुनाव
यह समूचा विवाद ऐसे समय में चरम पर पहुंचा है जब पश्चिम बंगाल की दो बेहद अहम विधानसभा सीटों—नंदीग्राम और रेजीनगर—पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव होने जा रहे हैं। दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों ने पार्टी के संगठनात्मक नियंत्रण, मूल नाम और आरक्षित चुनाव चिह्न पर अपना-अपना दावा ठोका था। चुनावी प्रक्रिया में किसी भी प्रकार के भ्रम और असमानता से बचने के लिए चुनाव आयोग ने स्क्रूटनी और मतदान को ध्यान में रखते हुए यह अंतरिम कदम उठाया है, जिसके बाद बंगाल की राजनीति में खींचतान और बढ़ गई है।



