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छिन गया पुराना सिंबल? ममता अब ‘फुटबॉल’ पर लड़ेंगी चुनाव, बागियों को मिला ‘लिफाफा’

निर्वाचन आयोग ने तृणमूल कांग्रेस के दोनों गुटों को नए नाम और सिंबल आवंटित किए हैं; ममता गुट को 'फुटबॉल खिलाड़ी' और बागी गुट को 'लिफाफा' चुनाव चिह्न मिला है।
ममता को 'फुटबॉल खिलाड़ी',

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New Delhi: पश्चिम बंगाल की सियासत में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर मचे घमासान के बीच निर्वाचन आयोग (ECI) ने एक बड़ा और निर्णायक आदेश जारी किया है। आयोग ने पार्टी के दोनों प्रतिद्वंद्वी खेमों के लिए अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न आवंटित कर दिए हैं।

इस फैसले के तहत मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले आधिकारिक गुट को अब ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ के नाम से जाना जाएगा और पार्टी का नया चुनाव चिह्न ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ होगा। वहीं, पार्टी से बगावत करने वाले धड़े को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ (Envelope) सिंबल मिला है। इस फैसले के बाद राज्य के राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं।

फॉर्म-बी के आधार पर तय हुई उम्मीदवारों की मान्यता

निर्वाचन आयोग द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के मुताबिक, ममता बनर्जी द्वारा अधिकृत फॉर्म-बी के जरिए नामांकन दाखिल करने वाले प्रत्याशी ही ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ के अधिकृत उम्मीदवार माने जाएंगे। इन प्रत्याशियों को ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ सिंबल दिया जाएगा, जो लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 36 के वैधानिक नियमों के अधीन रहेगा। इस खेमे से पश्चिम बंगाल की 70-रेजीनगर सीट से रबीउल आलम चौधरी, प्रतिष्ठित 210-नंदीग्राम सीट से संचिता प्रधान और असम की 9-नगांव संसदीय सीट से अब्दुल सलाम चुनाव मैदान में उतरेंगे।

अरूप रॉय खेमे को मिला ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न

दूसरी ओर, बागी गुट की कमान संभाल रहे अरूप रॉय द्वारा अधिकृत फॉर्म-बी पर पर्चा भरने वाले उम्मीदवार ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ के अधिकृत प्रत्याशी गिने जाएंगे। आयोग ने इनके लिए ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न तय किया है। इसके तहत सफिउज्जमान शेख और नंदीग्राम विधानसभा क्षेत्र से एहतेशमुल हक बागी खेमे के उम्मीदवार के तौर पर ताल ठोकेंगे। निर्वाचन आयोग ने साफ किया है कि दोनों पक्षों के लिए यह व्यवस्था तभी प्रभावी होगी जब वे सभी तय वैधानिक और कानूनी औपचारिकताओं को पूरा करेंगे।

रिटर्निंग अफसरों को सख्त दिशा-निर्देश जारी

चुनाव आयोग के सचिव अश्वनी कुमार मोहाल द्वारा जारी अधिसूचना में पश्चिम बंगाल के रेजीनगर, नंदीग्राम और असम की नगांव सीट के संबंधित रिटर्निंग अफसरों (RO) को इन निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है। आदेश में रेखांकित किया गया है कि स्क्रूटनी (नामांकन पत्रों की जांच) के दौरान निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 36 के तहत ही दस्तावेजों की वैधता की अंतिम पुष्टि की जाए।

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