हजारीबाग: झारखंड के हजारीबाग जिले में कोयला खनन के लिए रास्ता बनाने के दौरान NTPC ने 12.75 करोड़ रुपये की लागत से बने वाटर टावर को डायनामाइट लगाकर ध्वस्त कर दिया। इस टावर का करीब 95 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका था। इसके टूटने से आसपास के करीब 5 हजार ग्रामीणों के सामने पेयजल संकट खड़ा हो गया है।
यह वाटर टावर पचड़ा-जोरदाग ग्रामीण जलापूर्ति योजना के तहत बनाया गया था। टावर को ध्वस्त किए जाने से जलापूर्ति की पाइपलाइन भी क्षतिग्रस्त हो गई है। इस मामले में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने NTPC के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है।
बिना अनुमति टावर तोड़ने पर विभाग नाराज
पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री योगेंद्र प्रसाद महतो ने घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। उन्होंने अधिकारियों को दोषियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने और नुकसान की भरपाई कराने का निर्देश दिया है।
मंत्री के अनुसार, इस जलापूर्ति योजना पर 12.75 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे थे। इसमें से संवेदक को 10 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान भी किया जा चुका था।
NTPC से मांगा गया स्पष्टीकरण
मंत्री योगेंद्र प्रसाद महतो ने कहा कि वाटर टावर को ध्वस्त करने से पहले NTPC ने पेयजल एवं स्वच्छता विभाग से कोई अनुमति नहीं ली थी। कंपनी ने इसके लिए NOC भी नहीं लिया था।
उन्होंने कहा कि बिना किसी पूर्व सूचना के डायनामाइट लगाकर सरकारी संपत्ति को ध्वस्त करना गलत है। खनन या विकास कार्यों के नाम पर सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना उचित नहीं है।
दोषियों से होगी नुकसान की भरपाई
मंत्री ने कहा कि इस पूरे मामले की जांच की जा रही है। जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होगी और नुकसान की भरपाई भी कराई जाएगी।
विभाग ने मामले में प्राथमिकी दर्ज कराई है। अब NTPC से इस मामले में जवाब मांगा गया है। वाटर टावर और पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने से प्रभावित ग्रामीणों के सामने पेयजल की समस्या खड़ी हो गई है।






