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जल संरक्षण और विकास का नया ‘बार्टरवाटर’ मॉडल, स्वच्छ पानी के साथ बदल रही ग्रामीण अर्थव्यवस्था

रेनबो क्रेडिट और एआई तकनीक से समृद्ध होगी प्रकृति, बिहार से शुरू हुआ प्रयोग अब झारखंड और असम में

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रांची: भारत के ग्रामीण अंचलों में जल संकट, भूजल प्रदूषण और पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने के लिए ‘बार्टरवाटर’ (BarterWATER) के रूप में एक अभिनव और टिकाऊ मॉडल आकार ले रहा है। WHEELS Global Foundation, WIN Foundation तथा WaterBANK Foundation की साझा पहल से शुरू हुआ यह मॉडल केवल स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जल संरक्षण, कचरा प्रबंधन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को एक साथ जोड़ने की अनूठी कोशिश है। इस दूरदर्शी पहल का विस्तार अब बिहार के साथ-साथ झारखंड और असम के ग्रामीण इलाकों में भी हो रहा है।
इस मॉडल की सबसे बड़ी खासियत इसकी ‘रेनबो क्रेडिट’ (Rainbow Credit) प्रणाली है। इसके तहत ग्रामीण परिवारों को जल संरक्षण, ग्रे-वॉटर प्रबंधन और कचरा पृथक्करण जैसे प्रकृति-अनुकूल कार्यों के लिए डिजिटल क्रेडिट दिए जाते हैं। उदाहरण के तौर पर, नेट-जीरो ग्रे-वॉटर डिस्चार्ज अपनाने वाले परिवारों को 1,000 तक रेनबो क्रेडिट मिलते हैं, जिनका उपयोग वे शुद्ध पेयजल प्राप्त करने या बांस से बने सजावटी व उपयोगी उत्पाद खरीदने में कर सकते हैं। इस व्यवस्था का सफल पायलट चरण 16 फरवरी 2025 को बिहार के आरा जिले स्थित पकड़ी गांव में पहले WaterBANK यूनिट के साथ शुरू हुआ था।
पेयजल में आर्सेनिक जैसे जानलेवा प्रदूषण से निपटने के लिए इसमें IIT खड़गपुर द्वारा विकसित OAS तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो लेटराइट खनिज के माध्यम से पानी को स्वच्छ बनाती है। इसके अलावा, प्रणाली को सौर ऊर्जा से संचालित करने के लिए ‘हस्क पावर सिस्टम्स’ और तकनीक के व्यवसायीकरण हेतु ‘VAS Bros. Enterprises’ की मदद ली जा रही है। अब इस पहल में AIoT और डिजिटल ट्विन (Digital Twin) जैसी अत्याधुनिक तकनीकों को जोड़ा जा रहा है, जिससे वास्तविक समय में जल संसाधनों की निगरानी करने और जल-कुशल कृषि के लिए सटीक पूर्वानुमान लगाने में मदद मिलेगी।
राष्ट्रीय स्तर पर NITI आयोग, राष्ट्रीय बांस मिशन और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा सराहा गया यह मॉडल अब वैश्विक मंच पर पहचान बनाने की तैयारी में है। 8 से 10 दिसंबर को अबू धाबी में आयोजित होने वाले संयुक्त राष्ट्र जल सम्मेलन (UN Water Conference) में ‘बार्टरवाटर’ मॉडल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत किया जाएगा, जिससे दुनिया के अन्य जल-संकटग्रस्त क्षेत्रों को भी भारत की इस समुदाय-केंद्रित और तकनीक-आधारित पहल का लाभ मिल सके।
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