पश्चिमी सिंहभूम: झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले में नोवामुंडी, गुवा, मनोहरपुर और झींकपानी को नगर पंचायत बनाने की तैयारी का विरोध शुरू हो गया है। मंगलवार को मानकी-मुंडा संघ ने इस प्रस्ताव के खिलाफ नोवामुंडी प्रखंड परिसर में एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन किया।
कोल्हान-पोड़ाहाट, नोवामुंडी अंचल समिति के नेतृत्व में आयोजित इस धरने में अलग-अलग गांवों से पहुंचे मानकी-मुंडा प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों ने पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था और ग्रामीणों के अधिकारों का हवाला देते हुए नगर पंचायत बनाने के प्रस्ताव को वापस लेने की मांग की।
संघ ने प्रशासन के सामने रखीं चार मांगें
धरने के दौरान मानकी-मुंडा संघ ने प्रशासन के सामने चार प्रमुख मांगें रखीं।
- नोवामुंडी, गुवा, मनोहरपुर और झींकपानी को नगर पंचायत बनाने के प्रस्ताव पर रोक लगाई जाए।
- डीएमएफटी फंड में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
- नोवामुंडी बाजार को अतिक्रमण मुक्त कराया जाए।
- सामुदायिक शौचालयों की नियमित साफ-सफाई सुनिश्चित की जाए।
पारंपरिक व्यवस्था को लेकर जताई चिंता
धरने को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले स्थानीय लोगों की सहमति के बिना नहीं लिए जाने चाहिए। मानकी-मुंडा की पारंपरिक व्यवस्था क्षेत्र की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान का अहम हिस्सा है।
उन्होंने कहा कि नगर पंचायत बनाने से पहले संबंधित गांवों के लोगों की राय लेना जरूरी है। ग्रामीणों की भावनाओं और अधिकारों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
डीएमएफटी फंड की जांच की मांग
प्रदर्शनकारियों ने डीएमएफटी फंड के इस्तेमाल में कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग भी उठाई। उन्होंने कहा कि विकास योजनाओं का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचना चाहिए।
इसके अलावा नोवामुंडी बाजार में बढ़ते अतिक्रमण और सामुदायिक शौचालयों की खराब सफाई व्यवस्था पर भी नाराजगी जताई गई।
मानकी-मुंडा संघ ने प्रशासन से सभी मांगों पर गंभीरता से विचार कर जल्द निर्णय लेने की अपील की। संघ ने कहा कि ग्रामीणों के हितों और पारंपरिक व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर उनकी आवाज को अनसुना नहीं किया जाना चाहिए।





