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मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन से जेपीएससी सदस्य डॉ. जमाल अहमद की मुलाकात, भेंट की पुस्तक “बाबा-ए-झारखंड”

Ranchi : मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन से आज कांके रोड स्थित मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय में झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) के सदस्य डॉ. जमाल अहमद ने शिष्टाचार मुलाकात की। इस अवसर पर डॉ. अहमद ने मुख्यमंत्री को अपनी नई पुस्तक “बाबा-ए-झारखंड : शिबू सोरेन – दानिश्वरों

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Ranchi : मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन से आज कांके रोड स्थित मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय में झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) के सदस्य डॉ. जमाल अहमद ने शिष्टाचार मुलाकात की। इस अवसर पर डॉ. अहमद ने मुख्यमंत्री को अपनी नई पुस्तक “बाबा-ए-झारखंड : शिबू सोरेन – दानिश्वरों की नजर में” सप्रेम भेंट की। यह पुस्तक झारखंड आंदोलन के प्रणेता और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री दिशोम गुरु स्व. शिबू सोरेन के जीवन, संघर्ष और योगदान पर आधारित है।

मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने पुस्तक स्वीकार करते हुए डॉ. अहमद के इस साहित्यिक प्रयास की सराहना की। उन्होंने कहा कि दिशोम गुरु शिबू सोरेन का जीवन झारखंड की अस्मिता, संघर्ष और स्वाभिमान का प्रतीक रहा है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि ऐसी पुस्तकें नई पीढ़ी को अपने इतिहास, परंपरा और समाज के अग्रणी नेताओं के संघर्षों से जोड़ने का कार्य करती हैं।

डॉ. जमाल अहमद ने बताया कि यह पुस्तक शिबू सोरेन के राजनीतिक, सामाजिक और जनसेवी जीवन पर किए गए वर्षों के गहन अध्ययन का परिणाम है। इसमें झारखंड आंदोलन से लेकर राज्य निर्माण तक की महत्वपूर्ण घटनाओं का विस्तृत और तथ्यपरक उल्लेख किया गया है। पुस्तक में यह दर्शाने का प्रयास किया गया है कि किस प्रकार एक सामान्य किसान परिवार से निकलकर शिबू सोरेन ने आदिवासी अस्मिता, जल-जंगल-जमीन और सामाजिक न्याय की लड़ाई को राष्ट्रीय स्तर तक पहुँचाया।

लेखक ने इस पुस्तक के माध्यम से इतिहास के कई अछूते अध्यायों को सामने लाने की कोशिश की है। इसमें झारखंड आंदोलन के प्रमुख चरणों, सामाजिक बदलावों, आर्थिक असमानता और आदिवासी समुदाय के संघर्षों को गहराई से चित्रित किया गया है। भाषा सरल, संवादात्मक और शोधपरक होने के कारण यह पुस्तक न केवल शोधार्थियों बल्कि आम पाठकों के लिए भी उपयोगी सिद्ध होगी।

पुस्तक की एक और खास बात यह है कि इसमें डॉ. जमाल अहमद के साथ-साथ कई आयु वर्ग के लेखक शामिल हैं, जो झारखंड, जम्मू-कश्मीर, बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश एवं महाराष्ट्र के निवासी हैं। सभी उप लेखकों का व्यवसाय भी अलग-अलग है अर्थात पुस्तक में बौद्धिक एकता, सजगता एवं अनुभव का अनोखा संगम है। उर्दू भाषा में लिखी और 416 पृष्ठों से सजी यह पुस्तक झारखंड के सामाजिक इतिहास का मौन एवं जनमानस की आकांक्षाओं का जीवित दस्तावेज है। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर आशा व्यक्त की कि “बाबा-ए-झारखंड” पुस्तक राज्य के युवाओं को प्रेरित करेगी और झारखंड के गौरवशाली इतिहास को सहेजने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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