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भवन मानचित्र अनुमोदन मामले में झारखंड उच्च न्यायालय ने जनहित याचिका की खारिज

Ranchi : झारखंड उच्च न्यायालय ने रांची नगर निगम द्वारा भवन मानचित्र (मैप) अनुमोदन में संभावित अनियमितताओं से संबंधित जनहित याचिका का शुक्रवार को निपटारा कर दिया। मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने नगर निगम की ओर से प्रस्तुत जवाब और कार्रवाई को संतोषजनक

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Ranchi : झारखंड उच्च न्यायालय ने रांची नगर निगम द्वारा भवन मानचित्र (मैप) अनुमोदन में संभावित अनियमितताओं से संबंधित जनहित याचिका का शुक्रवार को निपटारा कर दिया। मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने नगर निगम की ओर से प्रस्तुत जवाब और कार्रवाई को संतोषजनक पाते हुए याचिका का निष्पादन कर दिया।

इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने की। नगर निगम की ओर से उपस्थित अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि भवन नक्शा स्वीकृति से संबंधित आवेदनों पर तेजी से काम किया जा रहा है और प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए कई सुधारात्मक कदम उठाए गए हैं।

नगर निगम की रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई 2023 से अब तक नक्शा स्वीकृति के 2500 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 2100 से अधिक आवेदनों को स्वीकृति दे दी गई है, जबकि शेष आवेदनों पर प्रक्रिया जारी है। निगम के अधिवक्ता ने बताया कि सभी आवेदनों की तकनीकी जांच मानक प्रक्रिया के अनुसार की जा रही है और किसी भी आवेदक को अनावश्यक रूप से प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ रही है।

अदालत ने निगम द्वारा किए गए काम की सराहना करते हुए कहा कि चूंकि अब नक्शा पास करने की प्रक्रिया संतोषजनक गति और व्यवस्था के साथ चल रही है, इसलिए याचिका को आगे जारी रखने की कोई आवश्यकता नहीं है। इसके साथ ही अदालत ने जनहित याचिका का निपटारा (Dispose) कर दिया।

यह याचिका भवन निर्माण नक्शा पास करने में कथित देरी और अनियमितता को लेकर दाखिल की गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि रांची नगर निगम समय पर अनुमति नहीं देता और इससे आम नागरिकों और बिल्डरों को परेशानी झेलनी पड़ती है। हालांकि निगम द्वारा प्रस्तुत अद्यतन रिपोर्ट से यह स्पष्ट हुआ कि स्थिति में सुधार किया गया है और नक्शा अनुमोदन की प्रक्रिया अब सुव्यवस्थित रूप से संचालित हो रही है।

अदालत ने कहा कि नगर निगम को चाहिए कि वह आगे भी पारदर्शिता, प्राथमिकता और जनसुविधा के साथ कार्य करते हुए नक्शा स्वीकृति प्रक्रिया को और प्रभावी बनाए।

इस फैसले के बाद निर्माण क्षेत्र से जुड़े लोगों में राहत की भावना देखी जा रही है, क्योंकि इससे यह संकेत मिलता है कि भवन मानचित्र स्वीकृति प्रक्रिया अब तेजी से और अधिक पारदर्शी तरीके से की जाएगी।

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