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Jamshedpur: डीबीएमएस कदमा हाई स्कूल में छात्रों के रक्षासूत्र तोड़ने पर बवाल, शिक्षिका पर हिंदू विरोधी मानसिकता का आरोप

जमशेदपुर। डीबीएमएस कदमा हाई स्कूल में हिंदू छात्रों के हाथ से रक्षासूत्र जबरन तोड़ने और कूड़ेदान में फेंकने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। आरोप है कि मंगलवार को कक्षा 8-डी के छात्र आदित्य ओझा समेत कई बच्चों के रक्षासूत्र को स्कूल की शिक्षिका

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जमशेदपुर। डीबीएमएस कदमा हाई स्कूल में हिंदू छात्रों के हाथ से रक्षासूत्र जबरन तोड़ने और कूड़ेदान में फेंकने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। आरोप है कि मंगलवार को कक्षा 8-डी के छात्र आदित्य ओझा समेत कई बच्चों के रक्षासूत्र को स्कूल की शिक्षिका शगुफ्ता नाज़ ने धर्म के प्रतीक मानकर जबरन काटकर हटाया और आगे से न पहनने की चेतावनी दी।

इस घटना को लेकर छात्र के अभिभावक पवन ओझा ने विद्यालय प्रबंधन को ईमेल द्वारा पत्र भेजकर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। साथ ही इस कृत्य की तुलना धर्म-आधारित लक्षित हिंसा से की गई है।

इस पूरे मामले को उजागर करते हुए “शिक्षा सत्याग्रह” के संस्थापक अंकित आनंद ने जिला उपायुक्त और जिला शिक्षा अधीक्षक को पत्र सौंपते हुए कड़ी कार्रवाई की माँग की है। उन्होंने कहा, “यह कृत्य न केवल संविधान द्वारा प्रदत्त धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन है, बल्कि पहलगाम जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति का संकेत देता है, जहां धर्म पूछकर हिंदूओं को निशाना बनाया गया था। यदि 48 घंटे के भीतर कार्रवाई नहीं हुई, तो हम सड़क से लेकर कोर्ट तक संघर्ष करेंगे।” मामले की शिकायत राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अलावा कोल्हान प्रमंडल के क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशक तक भी हुई है।

इधर, AJSU पार्टी के जिला प्रवक्ता अप्पू तिवारी ने भी जिला शिक्षा अधीक्षक को पत्र लिखकर मामले की निंदा की है और शिक्षिका पर त्वरित कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा, “यह घटना किसी एक छात्र की नहीं, बल्कि कई बच्चों के साथ हुई है। स्कूलों में ऐसी हिंदू विरोधी मानसिकता पूरी पीढ़ी को प्रभावित करेगी। प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि दोषी के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई हो।”

शिकायतकर्ता अंकित आनंद के अनुसार मामले में जिला उपायुक्त के निर्देश पर वरीय पुलिस अधीक्षक ने कदमा थाना प्रभारी को जांच के लिए निर्देशित कर दिया है। वहीं, शिक्षा विभाग ने भी उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है। इस संबंध में स्कूल प्रबंधन का पक्ष लेने का प्रयास किया गया, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों से संपर्क नहीं हो सका।

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