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जमीन के नीचे बसाया ‘परमाणु शहर’, ईरान की ट्रंप को खुली चुनौती- दम है तो मारो!

World News: मध्य-पूर्व के बिगड़ते हालात अब एक ऐसे मोड़ पर आ गए हैं जहां से महायुद्ध की आहट साफ सुनाई दे रही है। ईरान की सड़कों पर प्रदर्शनकारियों की मौत का आंकड़ा 2000 को पार कर चुका है और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का

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World News: मध्य-पूर्व के बिगड़ते हालात अब एक ऐसे मोड़ पर आ गए हैं जहां से महायुद्ध की आहट साफ सुनाई दे रही है। ईरान की सड़कों पर प्रदर्शनकारियों की मौत का आंकड़ा 2000 को पार कर चुका है और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का अल्टीमेटम भी खत्म होने की कगार पर है। ट्रंप ने साफ लहजे में कहा है कि अगर कत्लेआम नहीं रुका तो अमेरिकी मिसाइलें तेहरान का रुख करेंगी। लेकिन ताज्जुब की बात यह है कि जून में अमेरिका से मार खाने के बाद भी ईरानी नेता झुकने के बजाय सीना तानकर कह रहे हैं— ‘दम है तो अटैक करके दिखाओ’।

जून 2025 की वो काली रात और ईरान का सबक

पूरी दुनिया हैरान है कि आखिर ईरान इतना ‘कॉन्फिडेंस’ कहां से ला रहा है? याद दिला दें कि जून 2025 में अमेरिका ने ‘ऑपरेशन मिडनाइट हैमर’ के जरिए ईरान के नतांज और फोर्डो ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचाया था। लेकिन अब जो खबरें छनकर आ रही हैं, वे चौंकाने वाली हैं। कहा जा रहा है कि उस हमले ने ईरान को बर्बाद नहीं किया, बल्कि उसे और भी शातिर बना दिया है।

‘पिकाक्स माउंटेन’ के सीने में छिपा है नया ‘परमाणु शहर’

खुफिया रिपोर्ट्स की मानें तो ईरान ने नतांज के पास ही ‘पिकाक्स माउंटेन’ के भीतर एक विशाल भूमिगत शहर बसा लिया है। यह ठिकाना जमीन से करीब 80 से 100 मीटर नीचे है और कंक्रीट की ऐसी अभेद्य परतों से ढका है जिसे दुनिया का कोई भी बंकर-बस्टर बम आसानी से नहीं भेद सकता। दावा तो यहां तक है कि जून के हमले से ऐन पहले ईरान ने अपना सारा संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) फोर्डो से हटाकर इन गुप्त सुरंगों में शिफ्ट कर दिया था।

तालेघन-2: कंक्रीट का वो अभेद्य ताबूत

ईरान ने अपने पुराने केंद्र के पास ही ‘तालेघन-2’ का निर्माण पूरा कर लिया है। इसे कंक्रीट के एक विशाल ताबूत जैसी शक्ल दी गई है ताकि परमाणु हथियारों को अमेरिकी हमलों से सुरक्षित रखा जा सके। खामेनेई के नेताओं का यह अहंकार इसी ‘अदृश्य शक्ति’ के दम पर है। उन्हें भरोसा है कि उनके परमाणु हथियार अब ट्रंप की मिसाइलों की पहुंच से कोसों दूर पहाड़ों की गहराई में सुरक्षित हैं। अब सवाल यह है कि क्या ट्रंप इस नई चुनौती का सामना करने के लिए किसी और भी बड़े और घातक ऑपरेशन की तैयारी करेंगे?

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