रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की परीक्षाओं में कथित धांधली और भ्रष्टाचार को लेकर राजधानी रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में चल रहा छात्रों का अनिश्चितकालीन सत्याग्रह और अधिक तीव्र हो गया है। आंदोलन के आठवें दिन राज्य सरकार ने गतिरोध समाप्त करने की दिशा में पहल करते हुए आंदोलनरत अभ्यर्थियों को बातचीत का औपचारिक न्योता भेजा। हालांकि, छात्रों ने बंद कमरे या मुख्यमंत्री आवास में सीमित प्रतिनिधियों के साथ किसी भी प्रकार की वार्ता से साफ इनकार कर दिया है।
प्रशासन का प्रस्ताव और छात्रों का रुख
बुधवार को अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) और अपर जिलाधिकारी (ADM Law & Order) धरनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने आंदोलनकारी युवाओं को सूचित किया कि मुख्यमंत्री ने शाम चार बजे मुख्यमंत्री आवास पर उनके साथ एक महत्वपूर्ण बैठक तय की है। इसके तहत प्रशासनिक अधिकारियों ने छात्रों के एक 5-सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को मुख्यमंत्री से मुलाकात और मांगों पर विस्तार से चर्चा करने के लिए आमंत्रित किया।
लेकिन धरनास्थल पर एकजुट हजारों अभ्यर्थियों ने प्रशासनिक प्रस्ताव को एक स्वर में ठुकरा दिया। छात्र प्रतिनिधियों का कहना था कि यह आंदोलन किसी पांच व्यक्तियों या चुनिंदा नेताओं का निजी मुद्दा नहीं है, बल्कि पूरे झारखंड के लाखों युवाओं के भविष्य और राज्य की पारदर्शी परीक्षा प्रणाली से जुड़ा हुआ एक संवेदनशील जनआंदोलन है। अभ्यर्थियों ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार सचमुच युवाओं की समस्याओं का समाधान करने के प्रति गंभीर है, तो मुख्यमंत्री को स्वयं जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम आकर सभी छात्रों के समक्ष खुले मंच से बातचीत करनी चाहिए।
क्या हैं आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगें?
आंदोलनकारी छात्रों ने जोर देकर कहा कि केवल वार्ता का औपचारिकता भरा निमंत्रण देना समस्याओं का हल नहीं है। सरकार को युवाओं की लंबे समय से लंबित मांगों पर ठोस और पारदर्शी कदम उठाने होंगे:
निष्पक्ष जांच का आश्वासन: 14वीं जेपीएससी (JPSC), जेएसएससी-सीजीएल (JSSC-CGL), और विवादित निजी एजेंसी टीडीपीएल (TDPL) द्वारा संचालित तमाम भर्ती परीक्षाओं में हुई अनियमितताओं की सीबीआई (CBI) या उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की स्वतंत्र समिति से जांच कराई जाए।
धांधली वाली परीक्षाएं रद्द हों: जिन परीक्षाओं में पेपर लीक, ओएमआर शीट (OMR Sheet) में गड़बड़ी और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप साबित हो रहे हैं, उन्हें तत्काल प्रभाव से रद्द कर नए सिरे से निष्पक्ष परीक्षा आयोजित हो।
भ्रष्टाचार मुक्त पारदर्शी व्यवस्था: भविष्य की सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए एक पारदर्शी परीक्षा कैलेंडर, स्पष्ट कट-ऑफ अंक और भ्रष्टाचार-मुक्त प्रणाली सुनिश्चित की जाए।
दोषियों पर सख्त कार्रवाई: भर्ती धांधली में शामिल अधिकारियों, पेपर लीक माफिया और संलिप्त एजेंसियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई का स्पष्ट आश्वासन दिया जाए।
‘पारदर्शिता के बिना खत्म नहीं होगा सत्याग्रह’
जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में 29 जुलाई से चल रहे इस अनिश्चितकालीन सत्याग्रह में छात्र भीषण गर्मी और बारिश के बीच डटे हुए हैं। कई छात्र भूख हड़ताल पर भी बैठ चुके हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि पूर्व में कई बार केवल आश्वासनों के आधार पर आंदोलनों को समाप्त कराया गया है, लेकिन इस बार युवा आर-पार के मूड में हैं।
छात्रों का मानना है कि बंद कमरे की वार्ताओं में पारदर्शिता का अभाव रहता है। यदि मुख्यमंत्री सार्वजनिक रूप से सभी अभ्यर्थियों के सामने अपना पक्ष रखेंगे, तो इससे सरकार की नीयत और मंशा पूरी तरह स्पष्ट होगी, जिससे राज्य के लाखों युवाओं का विश्वास पुनः बहाल हो सकेगा। अभ्यर्थियों ने दो टूक शब्दों में कहा है कि जब तक उनकी मांगों पर लिखित में ठोस फैसला और प्रभावी कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका यह सत्याग्रह और आंदोलन अनवरत जारी रहेगा।





