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टाइट जूते और हाई हील्स पहनने से शरीर पर पड़ता है बुरा असर: रिसर्च

टाइट जूते और रोजाना हाई हील्स पहनने से पैरों में छाले, कॉर्न, मस्कुलोस्केलेटल दर्द और घुटनों पर दबाव बढ़ सकता है, सही फुटवियर का चुनाव बेहद जरूरी है।
टाइट जूते और हाई हील्स

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Lifestyle Adda: हम अक्सर अपने कपड़ों, हेयरस्टाइल और ओवरऑल फिटनेस पर तो खूब ध्यान देते हैं, लेकिन पैरों में क्या पहन रहे हैं, इस पर गंभीरता से विचार नहीं करते। ज्यादातर लोग जूते या सैंडल खरीदते समय केवल उनके डिजाइन, ट्रेंडी रंग और कीमत को ही प्राथमिकता देते हैं। हालांकि, मेडिकल साइंस के अनुसार फुटवियर सिर्फ फैशन या स्टाइल का हिस्सा नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर व्यक्ति के चलने के तरीके (Gait), पैरों के दबाव और शरीर के निचले हिस्से की गतिशीलता पर पड़ता है। गलत साइज या खराब डिजाइन वाले फुटवियर लंबे समय तक पहनने से पैरों में तेज दर्द और कई मस्कुलोस्केलेटल समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

टाइट और संकरे जूतों से छाले व कॉर्न का खतरा

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि जूता पैर के साइज से छोटा या जरूरत से ज्यादा टाइट है, तो पैर की उंगलियों को पर्याप्त जगह नहीं मिल पाती। इससे उंगलियों पर लगातार अनुचित दबाव बना रहता है। लंबे समय तक ऐसा फुटवियर पहनने से पैरों में दर्द, छाले (Blisters), कॉर्न और त्वचा पर सख्त व मोटी परत जमने जैसी दिक्कतें शुरू हो जाती हैं। बहुत से लोग खरीदारी के समय सिर्फ यह देखते हैं कि पैर जूते में घुस रहा है या नहीं, जबकि जूते की आगे की चौड़ाई (Toe Box) भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। आगे से संकरा जूता उंगलियों को आपस में दबा देता है, जिससे चलने में भारी असहजता होती है। इसलिए ऐसा जूता चुनना चाहिए जिसमें उंगलियों को हिलने-डुलने की पूरी जगह मिले।

हाई हील्स से घुटनों और जोड़ों पर बुरा प्रभाव

रोजाना और लंबे समय तक हाई हील्स पहनना सिर्फ पैरों तक सीमित नुकसान नहीं पहुंचाता। विभिन्न रिसर्च में हाई हील्स को पैर की प्राकृतिक बनावट में विकृति, मस्कुलोस्केलेटल दर्द और जोड़ों में चोट के बढ़ते खतरे से सीधे तौर पर जोड़ा गया है। एक मेटा-एनालिसिस के मुताबिक, ऊंची हील पहनकर चलने से घुटनों पर पड़ने वाला भार और जॉइंट मोमेंट असामान्य रूप से बढ़ जाता है। हालांकि कभी-कभार पार्टी में हील पहनना ज्यादा नुकसानदेह नहीं है, लेकिन इसे दैनिक दिनचर्या बनाना गंभीर जोड़ों के दर्द को न्योता देना है।

सही फुटवियर का चुनाव कैसे करें?

चूंकि पैर पूरे शरीर का वजन जमीन पर संभालते हैं, इसलिए जूते का डिजाइन बदलते ही चाल में भी बदलाव आ जाता है। जूता ऐसा होना चाहिए जिसमें पैर पूरी तरह रिलैक्स रहे, उंगलियों पर कोई खिंचाव न आए और चलते समय एड़ी बार-बार बाहर न फिसले। यदि कोई जूता पहनने के कुछ देर बाद ही पैरों में दर्द, चुभन या जलन महसूस होने लगे, तो उसे नजरअंदाज करने के बजाय तुरंत बदल देना चाहिए।

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Samsul Haque

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