Patna: गया जिले के नीमचक बथानी प्रखंड की नैली पंचायत के गोवडीहा गांव की पिंकी कुमारी ने मेहनत और जीविका स्वयं सहायता समूह से मिले आर्थिक सहयोग के दम पर अपनी जिंदगी की दिशा बदल दी है। कभी कृषि कार्य के सहारे परिवार चलाने वाली पिंकी आज पेवर ब्लॉक निर्माण और बिक्री का सफल कारोबार कर रही हैं। इस व्यवसाय से उन्हें हर महीने करीब 70 से 85 हजार रुपये की शुद्ध आमदनी हो रही है।
पिंकी ने जीविका से मिले एक लाख रुपये के ऋण से पेवर ब्लॉक निर्माण की इकाई शुरू की थी। धीरे-धीरे कारोबार बढ़ा और मांग बढ़ने के साथ उनका उद्यम भी विस्तार करता गया। आज उनकी फैक्ट्री में तैयार पेवर ब्लॉक आसपास के क्षेत्रों में सड़कों, पार्कों और अन्य स्थानों की फ्लोरिंग के लिए इस्तेमाल किए जा रहे हैं।
2013 में जीविका समूह से जुड़ी थीं पिंकी
जीविका के अधिकारियों के अनुसार, पिंकी कुमारी वर्ष 2013 में संगम जीविका महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ी थीं। जीविका से जुड़ने से पहले वह और उनके पति पिंटू कुमार कृषि कार्य के जरिए किसी तरह परिवार का भरण-पोषण कर रहे थे। इसी दौरान स्वयं सहायता समूह के माध्यम से पिंकी को एक लाख रुपये का ऋण मिला। उन्होंने इस राशि का इस्तेमाल पेवर ब्लॉक निर्माण की इकाई शुरू करने में किया। शुरुआती स्तर पर शुरू हुआ यह कारोबार समय के साथ बढ़ता गया और पेवर ब्लॉक की मांग ने उनके व्यवसाय को नई गति दी।
कारोबार बढ़ा तो आय के साथ बढ़ा आत्मविश्वास
पिंकी बताती हैं कि जीविका से जुड़ने के बाद उन्हें जरूरत के अनुसार अपेक्षाकृत आसानी से ऋण उपलब्ध हुआ। इसी आर्थिक सहयोग ने उनके लिए अपना व्यवसाय शुरू करना संभव बनाया। कारोबार बढ़ने के साथ उन्होंने जीविका के माध्यम से समय-समय पर अतिरिक्त ऋण भी लिया और अपने उद्यम का विस्तार किया। व्यवसाय से होने वाली आय से उन्होंने ट्रैक्टर खरीदा और अपना घर भी बनवाया। पिंकी के मुताबिक, उनके कारोबार की सफलता को देखते हुए अब बैंक भी उन्हें ऋण देने के लिए आसानी से तैयार हो जाते हैं।
हर महीने 70 से 85 हजार रुपये की शुद्ध आमदनी
पेवर ब्लॉक निर्माण और बिक्री से पिंकी को वर्तमान में प्रतिमाह करीब 70 से 85 हजार रुपये की शुद्ध आमदनी हो रही है। इस हिसाब से उनकी सालाना शुद्ध आमदनी करीब 8.4 लाख से 10.2 लाख रुपये तक पहुंचती है। व्यवसाय में उनके पति पिंटू कुमार भी उनका पूरा सहयोग करते हैं। पिंकी का कहना है कि परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ-साथ इस कारोबार ने उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया है।
खुद आत्मनिर्भर बनीं, दूसरों के लिए भी रोजगार का रास्ता खोला
पिंकी की सफलता की खास बात यह है कि उनका उद्यम केवल उनके परिवार तक सीमित नहीं रहा। पेवर ब्लॉक निर्माण के कारोबार के जरिए आसपास के कई लोगों के लिए भी रोजगार का अवसर पैदा हुआ है। पिंकी का मानना है कि जीविका से मिले आर्थिक सहयोग ने उन्हें सिर्फ अपना व्यवसाय शुरू करने में मदद नहीं की, बल्कि आगे बढ़ने और दूसरों के लिए रोजगार के अवसर तैयार करने का रास्ता भी खोला। उनका पेवर ब्लॉक कारोबार ग्रामीण क्षेत्र में स्वरोजगार और महिला उद्यमिता की एक मिसाल के तौर पर सामने आया है।




