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21वीं सदी में भी बदहाल व्यवस्था: सड़क न होने से गर्भवती को ‘झिलंगी बहिंगा’ के सहारे लाया गया एंबुलेंस तक

घाघरा/गुमला: आजादी के सात दशक बाद भी गुमला जिले के घाघरा प्रखंड अंतर्गत दीरगांव पंचायत के सुदूरवर्ती झलकापाठ गांव तक सड़क नहीं पहुंच पाई है। इस बुनियादी सुविधा के अभाव का खामियाजा एक बार फिर ग्रामीणों को भुगतना पड़ा, जब एक गर्भवती महिला को अस्पताल

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घाघरा/गुमला: आजादी के सात दशक बाद भी गुमला जिले के घाघरा प्रखंड अंतर्गत दीरगांव पंचायत के सुदूरवर्ती झलकापाठ गांव तक सड़क नहीं पहुंच पाई है। इस बुनियादी सुविधा के अभाव का खामियाजा एक बार फिर ग्रामीणों को भुगतना पड़ा, जब एक गर्भवती महिला को अस्पताल पहुंचाने के लिए परिजनों को जान जोखिम में डालनी पड़ी।

आपात स्थिति में महिला को पारंपरिक झिलंगी बहिंगा (बांस की डोली) पर लिटाकर घंटों पैदल चलकर मुख्य मार्ग तक लाया गया। वहां से किसी तरह एंबुलेंस की व्यवस्था कर उसे अस्पताल भेजा जा सका। ग्रामीणों के अनुसार, यदि समय पर एंबुलेंस नहीं मिलती, तो महिला और बच्चे की जान पर गंभीर खतरा हो सकता था।

झलकापाठ गांव का सड़क से न जुड़ पाना आज भी क्षेत्र के विकास पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। ग्रामीणों का कहना है कि बीमार व्यक्ति हो या गर्भवती महिला, आपात स्थिति में अस्पताल पहुंचाना बेहद कठिन हो जाता है। कई बार हालात इतने गंभीर हो जाते हैं कि जान जाने का खतरा बना रहता है।

स्थानीय लोगों ने बताया कि हाल ही में दीरगांव पंचायत में आयोजित जनता दरबार में प्रखंड प्रशासन मौजूद था, जिससे क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति और समस्याएं अधिकारियों के संज्ञान में हैं। इसके बावजूद सड़क निर्माण की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द से जल्द झलकापाठ गांव को सड़क मार्ग से जोड़ने की मांग की है, ताकि भविष्य में किसी को इस तरह जान जोखिम में डालकर इलाज के लिए न ले जाना पड़े।

घाघरा से दीनदयाल रामघाघरा से दीनदयाल राम की रिपोट 

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