खनिज संपदा पर स्थानीय समुदाय के अधिकार और पारंपरिक ग्रामसभा की भूमिका मजबूत करने की मांग
बिशुनपुर (गुमला)। बिशुनपुर प्रखंड के बनालात गांव में पारंपरिक ग्रामसभा की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में पेसा कानून एवं झारखंड पेसा नियमावली 2025 के तहत ग्रामसभा को प्राप्त अधिकारों को प्रभावी रूप से धरातल पर लागू करने को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। ग्रामीणों ने कहा कि ग्रामसभा के अधिकार केवल सरकारी दस्तावेजों तक सीमित न रहें, बल्कि गांव के स्तर पर उनका वास्तविक क्रियान्वयन सुनिश्चित होना चाहिए।
बैठक में निर्णय लिया गया कि राजस्व अधिकार धनराशि, प्रोत्साहन राशि, दंड राशि, शुल्क राशि, लघु खनिज एवं वन उपज से प्राप्त रॉयल्टी, तालाब लीज से मिलने वाला राजस्व, बाजार प्रबंधन शुल्क, बालू घाट से प्राप्त शुल्क सहित अन्य आय को ग्रामसभा कोष में जमा किया जाएगा। ग्रामीणों ने इन संसाधनों से प्राप्त राशि के पारदर्शी और सामुदायिक हित में उपयोग पर भी जोर दिया।
बैठक में पेसा राज्य स्तरीय प्रशिक्षक (PESS SLMT) संतोष कुमार महतो, झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) के दक्षिणी छोटानागपुर प्रमंडल अध्यक्ष कृष्णा चिक बड़ाईक, जिला अध्यक्ष अनूप फ्रांसिस, प्रखंड अध्यक्ष प्रवीण उरांव एवं सचिव रोशन उरांव उपस्थित रहे।
पारंपरिक ग्रामसभा बनालात के अध्यक्ष बैग रामवृक्ष खेरवार, ग्राम प्रधान भिखाराम उरांव, कपिल उरांव और अनुज उरांव समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण बैठक में शामिल हुए। बाजार प्रबंध समिति की अध्यक्ष निलावती देवी, सचिव संध्या देवी, कोषाध्यक्ष जगवा उरांव सहित समिति के सदस्यों ने भी अपनी सहभागिता दर्ज कराई।
वक्ताओं ने कहा कि पेसा नियमावली के तहत मिले अधिकारों को गांव की पारंपरिक ग्रामसभा के माध्यम से लागू करना जरूरी है। इसके लिए गांव-गांव में जागरूकता और प्रशिक्षण के जरिए ग्रामसभा को मजबूत करने की बात कही गई।
खनिज संसाधनों पर स्थानीय अधिकार की मांग
बैठक के दौरान MMDR बिल को रद्द करने की मांग भी उठी। ग्रामीणों ने क्षेत्र के खनिज संसाधनों पर स्थानीय समुदाय के अधिकार और हितों की रक्षा की आवश्यकता जताई। उन्होंने कहा कि जमीन और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े निर्णयों में ग्रामसभा की भूमिका को प्रभावी बनाया जाना चाहिए।
रिपोर्ट: प्रदीप कुमार साहू




