रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षाओं में अनियमितताओं और जारी हलचल के बीच आयोग के सदस्य डॉ. जमाल अहमद ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। राज्यपाल को सौंपे गए अपने त्यागपत्र में उन्होंने खुद को एक पूर्व छात्र और संघर्ष से उभरा व्यक्ति बताते हुए भावुक संदेश लिखा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका यह कदम किसी व्यक्तिगत हार का परिणाम नहीं, बल्कि संवैधानिक संस्थाओं की प्रतिष्ठा और लाखों अभ्यर्थियों के विश्वास को बचाए रखने का एक संकल्प है।
“एक अभ्यर्थी की तरह समझता हूँ छात्रों का दर्द”
डॉ. जमाल अहमद ने अपने पत्र की शुरुआत ‘जोहार साथियों’ से करते हुए लिखा कि वह आज JPSC के केवल एक सदस्य के रूप में नहीं, बल्कि उस विद्यार्थी के नजरिए से बात कर रहे हैं जिसने कभी झारखंड के युवाओं की तरह ही सपने देखे थे और संघर्ष किया था। उन्होंने कहा, “पिछले कुछ दिनों में आयोग की परीक्षाओं से संबंधित जो घटनाक्रम सामने आए हैं, उनसे मैं बेहद व्यथित हूँ। प्रतियोगी परीक्षाएं सिर्फ एक परीक्षा नहीं होतीं, बल्कि यह लाखों युवाओं के वर्षों के परिश्रम, त्याग और उनके परिवारों के सपनों का परिणाम होती हैं। जब इन पर संदेह की एक भी रेखा खिंचती है, तो सबसे अधिक पीड़ा एक ईमानदार व्यवस्था को होती है।”
पारदर्शिता के लिए अपनों के हितों की दी बलि
अपने कार्यकाल में निष्पक्षता के दावों को रेखांकित करते हुए डॉ. अहमद ने कई निजी उदाहरण सामने रखे। उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी डॉ. हलीमा खातून जो NET, Ph.D. और स्वर्ण पदक विजेता हैं ने वर्ष 2018 में आवेदन करने के बावजूद 2022 में हुए इंटरव्यू में सिर्फ इसलिए भाग नहीं लिया ताकि आयोग की निष्पक्षता पर कोई सवाल न खड़े हों। इसी तरह, देश के प्रतिष्ठित संस्थानों से शिक्षित होने के बावजूद उनके पुत्रों ने भी JPSC की किसी परीक्षा में कभी भाग नहीं लिया।
इतना ही नहीं, हाल के वर्षों में जब विश्वविद्यालय सेवा में उनके कई साथियों का प्रमोशन हुआ, तब उन्होंने स्वयं अपना प्रमोशन छोड़ दिया ताकि पद या व्यक्तिगत हितों के कारण आयोग की निष्पक्षता और साख पर कोई उंगली न उठ सके।
मुश्किल दौर और सिद्धांतों से न हटने का दावा
डॉ. अहमद ने अपने त्यागपत्र में यह भी साझा किया कि आयोग के अपने कर्तव्यों को प्राथमिकता देने के कारण वह अस्वस्थ माता की सेवा तक ठीक से नहीं कर सके। वहीं, आयोग में सामने आई अनिमितताओं के सवाल पर उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने स्तर पर जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए इन विषयों को सक्षम अधिकारियों तक पहुँचाने का प्रयास किया था।
मुख्यमंत्री का आभार और युवाओं को दिया संदेश
सदस्य पद पर मनोनीत करने के लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का आभार व्यक्त करते हुए डॉ. अहमद ने कहा कि राज्य की सेवा करना उनके सार्वजनिक जीवन का सबसे बड़ा सम्मान रहा है।
अंत में झारखंड के लाखों अभ्यर्थियों को आश्वस्त करते हुए उन्होंने लिखा, “एक साधारण परिवार से आने के कारण मैं जानता हूँ कि अभ्यर्थी की मेहनत और विश्वास ही उसकी सबसे बड़ी पूँजी है। आपका परिश्रम कभी व्यर्थ नहीं जाएगा। अपने सपनों पर विश्वास बनाए रखिए और ईमानदारी से आगे बढ़िए। मुझे पूरा भरोसा है कि सत्य, मेहनत और प्रतिभा की जीत अवश्य होगी।”





