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ढाका यूनिवर्सिटी में बड़ा उलटफेर: छात्र नेता उस्मान हादी के नाम हुआ ये हॉस्टल

World News: बांग्लादेश में चल रही राजनीतिक उथल-पुथल अब शैक्षणिक संस्थानों की दीवारों तक पहुँच गई है। ढाका विश्वविद्यालय, जिसे देश की राजनीति का पालना कहा जाता है, वहाँ शनिवार की रात एक ऐसी घटना घटी जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया

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World News: बांग्लादेश में चल रही राजनीतिक उथल-पुथल अब शैक्षणिक संस्थानों की दीवारों तक पहुँच गई है। ढाका विश्वविद्यालय, जिसे देश की राजनीति का पालना कहा जाता है, वहाँ शनिवार की रात एक ऐसी घटना घटी जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। दशकों से ‘बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान’ के नाम से पहचाने जाने वाले प्रतिष्ठित छात्रावास का नाम अब बदलकर ‘शहीद शरीफ उस्मान हादी’ हॉल कर दिया गया है। यह बदलाव केवल कागजों पर नहीं, बल्कि छात्रों के एक उग्र समूह ने जमीन पर उतरकर रातों-रात अंजाम दिया है।

क्रेन से हटी नामपट्टिका; मिटा दिया गया बंगबंधु का भित्तिचित्र

शनिवार की देर रात ढाका विश्वविद्यालय परिसर में हलचल तेज हो गई। छात्रों के एक समूह और हॉल यूनियन के पदाधिकारियों ने क्रेन और पेंट के डिब्बों के साथ छात्रावास पर धावा बोल दिया। सबसे पहले मुख्य द्वार पर लगी बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान की पुरानी नामपट्टिका को उखाड़ फेंका गया और उसकी जगह उस्मान हादी के नाम की नई पट्टिका लगा दी गई। इतना ही नहीं, छात्रावास की मुख्य इमारत पर बने शेख मुजीबुर रहमान के विशाल भित्तिचित्र (म्यूरल) को भी पेंट से पोत कर मिटा दिया गया। छात्रों का कहना है कि यह ‘नई आजादी’ का प्रतीक है और वे अब पुरानी विरासत को ढोना नहीं चाहते।

कौन थे उस्मान हादी, जिनके नाम पर हुआ ये बदलाव?

शरीफ उस्मान हादी वही छात्र नेता थे जिन्होंने जुलाई 2024 के विद्रोह में शेख हसीना की सत्ता को हिलाकर रख दिया था। 12 दिसंबर को ढाका के बिजयनगर में हुए एक जानलेवा हमले में उनके सिर में गोली लगी थी, जिसके बाद सिंगापुर में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। उनकी शहादत के बाद बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने राजकीय शोक भी घोषित किया था। अब विश्वविद्यालय के छात्रों ने उन्हें ‘शहीद’ का दर्जा देते हुए उनके नाम को अमर करने के लिए बंगबंधु के नाम को हटाने का फैसला किया है।

प्रशासनिक चुप्पी और बदलता बांग्लादेश

हैरानी की बात यह है कि इतनी बड़ी कार्रवाई के दौरान विश्वविद्यालय प्रशासन मूकदर्शक बना रहा। हॉल काउंसिल के पदाधिकारियों का दावा है कि यह कदम छात्रों की सामूहिक मांग पर उठाया गया है। यह घटना दर्शाती है कि बांग्लादेश की नई पीढ़ी अपने स्वतंत्रता संग्राम के नायकों और इतिहास को लेकर बिल्कुल अलग और आक्रामक दृष्टिकोण रख रही है। उस्मान हादी के समर्थकों के लिए यह एक ‘क्रांतिकारी युग’ की शुरुआत है, जबकि आलोचक इसे इतिहास को मिटाने की एक खतरनाक कोशिश मान रहे हैं।

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