फॉण्ट कनवर्टर NEW

सुलग रहा है बांग्लादेश: छात्र नेता की मौ’त के बाद भड़की हिंसा, मुश्किल में यूनुस

World News: नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली बांग्लादेश की अंतरिम सरकार इस वक्त अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही है। देश की कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है और सड़कों पर एक बार फिर छात्र आंदोलन की चिंगारी भड़क उठी

अपनी भाषा में पढ़ें

World News: नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली बांग्लादेश की अंतरिम सरकार इस वक्त अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही है। देश की कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है और सड़कों पर एक बार फिर छात्र आंदोलन की चिंगारी भड़क उठी है। इस भीषण अराजकता की वजह बनी है 32 वर्षीय उभरते छात्र नेता उस्मान हादी की नृशंस हत्या। हादी वही शख्स थे जिन्होंने शेख हसीना सरकार को सत्ता से उखाड़ फेंकने में अग्रणी भूमिका निभाई थी, लेकिन आज उनकी ही मौत ने नई सरकार के अस्तित्व पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।

कौन थे उस्मान हादी? आंदोलन के ‘पोस्टरबॉय’ से विवादित नेता तक का सफर

उस्मान हादी केवल एक छात्र नेता नहीं थे, बल्कि वे ‘इंकिलाब मंच’ के जरिए युवा आक्रोश की आवाज बन चुके थे। 2024 के आरक्षण सुधार आंदोलन में उनकी तस्वीरें विद्रोह की पहचान थीं। हालांकि, हादी की पहचान उनके कट्टर भारत-विरोधी बयानों और ‘ग्रेटर बांग्लादेश’ जैसी विवादित कल्पनाओं के लिए भी थी। इसी लोकप्रियता और कट्टरपंथी विचारधारा ने उन्हें राजनीति के शीर्ष पर पहुँचाया, लेकिन 12 दिसंबर को ढाका के पलटन इलाके में उनकी जिंदगी का सफर खूनी मोड़ पर रुक गया। बाइक सवार हमलावरों ने उनके सिर में गोली मारी, और 18 दिसंबर को सिंगापुर में उनकी मौत हो गई।

कातिलों की तलाश: 50 लाख का इनाम और सीमा पर सस्पेंस

उस्मान हादी की मौत के बाद बांग्लादेशी खुफिया तंत्र के हाथ अब तक खाली हैं। पुलिस ने मुख्य शूटर फैसल करीम मसूद और आलमगीर शेख पर 50 लाख टका का भारी-भरकम इनाम रखा है। शुरुआती चर्चा थी कि कातिल भारत भाग गए हैं, लेकिन ढाका पुलिस ने अब साफ कर दिया है कि अपराधी देश की सीमा के भीतर ही छिपे हैं। बड़ा सवाल यह है कि यदि सरकार इतनी शक्तिशाली है, तो उसकी नाक के नीचे एक राष्ट्रीय नेता की हत्या करने वाले अब तक बेनकाब क्यों नहीं हुए?

यूनुस सरकार के सामने बड़ी चुनौती; क्या चुनाव से पहले होगा तख्तापलट?

मोहम्मद यूनुस इस घटना को आगामी चुनावों को रोकने की साजिश बता रहे हैं। लेकिन जनता का आक्रोश अब काबू से बाहर होता जा रहा है। ढाका की सड़कों पर उतरी भीड़ अब केवल गिरफ्तारी नहीं, बल्कि सत्ता से जवाब मांग रही है। उस्मान हादी की हत्या ने साबित कर दिया है कि बांग्लादेश में शेख हसीना के जाने के बाद भी शांति कोसों दूर है। अगर जल्द ही हत्यारे नहीं पकड़े गए, तो यूनुस प्रशासन के लिए सत्ता बचाए रखना नामुमकिन हो जाएगा।

WhatsApp Group जुड़ने के लिए क्लिक करें 👉 Join Now
Facebook
X
Threads
WhatsApp
Telegram