बोकारो: बोकारो स्टील प्लांट (बीएसएल) ने बीपीएससीएल से ब्लास्ट फर्नेस-3 तक बारीक पिसे हुए कोयले (पुल्वराइज्ड कोल) पहुंचाने वाली आधुनिक कोल डस्ट इंजेक्शन (CDI) न्यूमैटिक कन्वेयिंग प्रणाली को सफलतापूर्वक शुरू किया है। इस परियोजना को 15 अगस्त 2026 को कमीशन किया गया।
इस प्रणाली के जरिए ब्लास्ट फर्नेस-3 तक कोल डस्ट की नियमित और नियंत्रित आपूर्ति की जाएगी। इससे ईंधन के बेहतर इस्तेमाल, उत्पादन लागत में कमी और संयंत्र की कार्यक्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
650 मीटर लंबी पाइपलाइन से होगी आपूर्ति
परियोजना के तहत बीपीएससीएल के कोल हैंडलिंग प्लांट में डम्पर रैंप बनाया गया और मौजूदा कन्वेयर सिस्टम में जरूरी बदलाव किए गए। कोल डस्ट को करीब 650 मीटर लंबी DN250 पाइपलाइन के जरिए ब्लास्ट फर्नेस-3 तक पहुंचाया जाएगा।
इस सिस्टम में दो ब्लो टैंक लगाए गए हैं, जिनकी क्षमता 1.4 घन मीटर है। ऑटोमेटिक सिस्टम के जरिए कोल डस्ट की नियंत्रित आपूर्ति की जाएगी। ब्लास्ट फर्नेस-3 में 24-वे स्प्लिट के माध्यम से कोल डस्ट को अलग-अलग ट्यूयर्स तक पहुंचाया जाएगा।
15 टन प्रति घंटे तक की क्षमता
कमीशनिंग परीक्षण के दौरान सिस्टम ने निर्धारित 10 टन प्रति घंटे की क्षमता के मुकाबले करीब 15 टन प्रति घंटे की सैद्धांतिक कन्वेइंग क्षमता दिखाई। हालांकि, वास्तविक क्षमता बीपीएससीएल की बॉल मिल की उत्पादन क्षमता पर निर्भर करेगी।
सिस्टम में PLC आधारित ऑटोमेशन, नाइट्रोजन प्रेशर रेगुलेशन और पर्जिंग जैसी सुरक्षा व्यवस्थाएं भी शामिल की गई हैं।
सालाना करीब 100 करोड़ रुपये बचत की उम्मीद
कोल डस्ट इंजेक्शन से ब्लास्ट फर्नेस में कोक की खपत कम करने में मदद मिलेगी। 0.85 के कोक रिप्लेसमेंट रेशियो के आधार पर परियोजना से लगभग 100 करोड़ रुपये सालाना की संभावित बचत का अनुमान है।
बीएसएल के अनुसार, इस परियोजना को अवधारणा से कमीशनिंग तक केवल चार महीने में पूरा किया गया। अधिकारियों के मुताबिक, यह परियोजना संयंत्र की तकनीकी क्षमता, स्वदेशी इंजीनियरिंग और टीमवर्क का उदाहरण है।




