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डॉ. रामदयाल मुंडा की 87वीं जयंती पर रांची में जुटेगा साहित्य और संस्कृति का संगम

जनजातीय भाषाओं के 9 साहित्यकारों को मिलेगा स्मृति सम्मान, अखड़ा में जुटेगी कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की और प्रबुद्ध हस्तियां

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रांची। जनजातीय अस्मिता और झारखंडी संस्कृति के संवाहक पद्मश्री डॉ. रामदयाल मुंडा की 87वीं जयंती पर 23 अगस्त को रांची विश्वविद्यालय के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग स्थित अखड़ा में एक दिवसीय विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। विश्वविद्यालय मुंडारी विभाग, मुंडारी साहित्य परिषद्, रुम्बुल और टाटा स्टील फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस समारोह में व्याख्यान के साथ-साथ ‘पद्मश्री डॉ. रामदयाल मुंडा स्मृति मुंडारी साहित्य सम्मान-2026’ का भव्य वितरण किया जाएगा।
कार्यक्रम का मुख्य विषय “झारखंड की पृष्ठभूमि में साहित्य एवं संस्कृति में डॉ. रामदयाल मुंडा का योगदान” रखा गया है। उद्घाटन सत्र की शुरुआत कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की (मुख्य अतिथि), झारखंड ओपन यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति डॉ. त्रिवेणी नाथ साहू (विशिष्ट अतिथि) तथा पद्मश्री मधु मंसूरी ‘हंसमुख’ (सम्माननीय अतिथि) द्वारा दीप प्रज्वलन और माल्यार्पण से होगी।
समारोह के मुख्य आकर्षण के रूप में राज्य की 9 विभिन्न जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं संताली, कुरमाली, कुड़ुख, नागपुरी, खोरठा, पंचपरगनिया, हो, खड़िया और मुंडारी के प्रतिष्ठित साहित्यकारों को सम्मानित किया जाएगा। सम्मानित होने वाली प्रमुख हस्तियों में सी.आर. मांझी, डॉ. वृंदावन महतो, डॉ. फ्रांसिस्का कुजूर, डॉ. कृष्ण प्रसाद ‘कलाधर’, डॉ. कुमारी शशि, डॉ. परमानंद महतो, दास राम बारदा, डॉ. इग्नासिया टोप्पो और डॉ. मनसिद्ध बड़ायउद शामिल हैं।
द्वितीय सत्र में मुंडारी विभाग के विद्यार्थियों के सांस्कृतिक प्रदर्शन और विशेष परिचर्चा के ज़रिए विभिन्न विश्वविद्यालयों के शिक्षक, शोधार्थी और भाषा-प्रेमी डॉ. मुंडा की सामाजिक एवं अकादमिक विरासत पर मंथन करेंगे।
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