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विद्यार्थी सहयोग पोर्टल: हॉस्टल या कॉलेज में परेशानी? अब नहीं रहेगी शिकायत अनसुनी

बिहार के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के छात्रों की शैक्षणिक व छात्रावास संबंधी समस्याओं के 30 दिनों में समाधान के लिए 25 अगस्त से 'विद्यार्थी सहयोग पोर्टल' और 1100 हेल्पलाइन शुरू हो रही है।

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Patna: बिहार सरकार ने राज्य के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं की समस्याओं के समयबद्ध और पारदर्शी समाधान के लिए ‘विद्यार्थी सहयोग पोर्टल’ शुरू करने का फैसला किया है। 25 अगस्त से राज्यभर में ‘विद्यार्थी सहयोग अभियान’ का विधिवत आगाज होगा। इस व्यवस्था के जरिए विद्यार्थी अपनी शैक्षणिक और छात्रावास (हॉस्टल) से जुड़ी शिकायतें व रचनात्मक सुझाव ऑनलाइन दर्ज करा सकेंगे। शिकायत दर्ज होने की तिथि से अधिकतम 30 दिनों के भीतर उसका निष्पादन कर छात्र को लिखित सूचना उपलब्ध कराई जाएगी।

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10 दिन में सुनवाई न होने पर CMO से जाएगा स्वतः नोटिस

प्रशासनिक जवाबदेही तय करने के लिए इस व्यवस्था में कड़े नियम बनाए गए हैं। यदि किसी छात्र की शिकायत पर 10 दिनों के भीतर संबंधित स्तर से कार्रवाई शुरू नहीं होती है, तो 11वें दिन मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) से सीधे स्वतः नोटिस जारी होगा। हर हाल में 30 दिनों के भीतर समस्या का समाधान अनिवार्य किया गया है। इसके साथ ही, जो छात्र ऑनलाइन माध्यम का उपयोग करने में असमर्थ हैं, वे टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1100 पर कॉल करके भी अपनी शिकायत या सुझाव दर्ज करा सकते हैं।

हर माह के चौथे मंगलवार को ‘विद्यार्थी सहयोग शिविर’

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में शिक्षा व्यवस्था को विद्यार्थी-केंद्रित बनाने के उद्देश्य से प्रत्येक माह के चौथे मंगलवार को शिक्षण संस्थानों में ‘विद्यार्थी सहयोग शिविर’ आयोजित किए जाएंगे। इन शिविरों में अधिकारी मौके पर मौजूद रहकर छात्र-छात्राओं से सीधा संवाद करेंगे और उनकी समस्याएं सुनेंगे। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि पोर्टल या हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराने वाले सभी विद्यार्थियों की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी, जिससे वे बिना किसी भय या दबाव के अपनी बात रख सकें।

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उच्च शिक्षा निदेशक ने बताया क्रांतिकारी कदम

उच्च शिक्षा निदेशक प्रो. एनके अग्रवाल ने बताया कि मुख्यमंत्री और उच्च शिक्षा मंत्री के मार्गदर्शन में तैयार यह पोर्टल छात्रों के हित में एक क्रांतिकारी कदम साबित होगा। उन्होंने कहा कि इस पहल से सरकार और विद्यार्थियों के बीच सीधा संवाद स्थापित होगा और योजनाओं की जमीनी निगरानी मजबूत होगी, जिससे 2047 तक ‘विकसित भारत’ के निर्माण में बिहार के युवाओं की प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित हो सकेगी।

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