Patna: बिहार विधानसभा में उपमुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री सम्राट चौधरी ने मंगलवार को आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 पेश किया। रिपोर्ट के अनुसार विकास दर के मामले में बिहार देश में दूसरे स्थान पर है। राज्य की विकास दर 14.47 प्रतिशत दर्ज की गई है, जबकि तेलंगाना 14.5 प्रतिशत के साथ पहले स्थान पर है। रिपोर्ट में प्रति व्यक्ति आय, सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी), राजकोषीय घाटा और कृषि उत्पादन सहित कई महत्वपूर्ण आर्थिक संकेतकों का उल्लेख किया गया है।
सम्राट चौधरी ने कहा कि आर्थिक सर्वेक्षण राज्य की अर्थव्यवस्था का आईना है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2006-07 से बिहार में आर्थिक सर्वेक्षण को विधानसभा के पटल पर रखने की परंपरा शुरू हुई थी और आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 इस श्रृंखला का 19वां सर्वेक्षण है।
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आर्थिक सर्वेक्षण की 12 बड़ी बातें
1. बिहार का जीएसडीपी बढ़ा- वर्ष 2023-24 में बिहार का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) वर्तमान मूल्य पर ₹8,54,429 करोड़ और 2011-12 के स्थिर मूल्य पर ₹4,64,540 करोड़ अनुमानित है।
2. विकास दर में मजबूत बढ़ोतरी- वर्ष 2023-24 में जीएसडीपी में पिछले वर्ष की तुलना में वर्तमान मूल्य पर 14.5% और स्थिर मूल्य पर 9.2% की वृद्धि दर्ज की गई।
3. स्थिर मूल्य पर प्रति व्यक्ति आय बढ़ी- स्थिर मूल्य पर राज्य की प्रति व्यक्ति आय वर्ष 2022-23 के ₹33,763 से बढ़कर वर्ष 2023-24 में ₹36,333 हो गई।
4. वर्तमान मूल्य पर प्रति व्यक्ति आय में इजाफा- वर्तमान मूल्य पर प्रति व्यक्ति आय वर्ष 2022-23 के ₹59,244 से बढ़कर वर्ष 2023-24 में ₹66,828 पहुंच गई।
5. राज्य के कुल व्यय में बढ़ोतरी- वर्ष 2023-24 में राज्य का कुल व्यय ₹2.52 लाख करोड़ था, जो 10.57 प्रतिशत बढ़कर वर्ष 2024-25 में ₹2.79 लाख करोड़ अनुमानित है।
6. विकास कार्यों पर सबसे अधिक खर्च- वर्ष 2023-24 में कुल बजट का 66.8 प्रतिशत यानी ₹1.69 लाख करोड़ विकासात्मक कार्यों पर खर्च हुआ। वर्ष 2024-25 में इसके ₹1.77 लाख करोड़ होने का अनुमान है।
7. पूंजीगत व्यय में वृद्धि- पूंजीगत परिव्यय वर्ष 2022-23 के ₹31,520 करोड़ से बढ़कर वर्ष 2023-24 में ₹36,453 करोड़ हो गया।
8. राजस्व बचत बरकरार- विवेकपूर्ण वित्तीय प्रबंधन के कारण वर्ष 2023-24 में ₹2,833 करोड़ की राजस्व बचत दर्ज की गई। वर्ष 2024-25 में ₹1,121 करोड़ की राजस्व बचत का अनुमान है।
9. राजकोषीय घाटा लगातार घटा- राज्य सरकार का सकल राजकोषीय घाटा वर्ष 2022-23 के ₹44,823 करोड़ से घटकर वर्ष 2023-24 में ₹35,660 करोड़ रह गया। वर्ष 2024-25 में इसके ₹29,095 करोड़ रहने का अनुमान है।
10. बकाया ऋण का अनुपात- वर्ष 2023-24 में सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) के प्रतिशत के रूप में राज्य का बकाया ऋण 38.94 प्रतिशत दर्ज किया गया।
11. ब्याज भुगतान का बोझ घटा- कुल राजस्व प्राप्ति में ब्याज भुगतान का अनुपात वर्ष 2023-24 के 9.11 प्रतिशत से घटकर वर्ष 2024-25 में 9.05 प्रतिशत अनुमानित है।
12. कृषि उत्पादन में बढ़ोतरी- वर्ष 2023-24 में पिछले वर्ष की तुलना में चावल का उत्पादन 21 प्रतिशत और गेहूं का उत्पादन 10.7 प्रतिशत बढ़ा है।
राजकोषीय घाटे में लगातार कमी
सम्राट चौधरी ने कहा कि राज्य का राजकोषीय घाटा लगातार नियंत्रण में है। वर्ष 2022-23 में यह ₹44,823 करोड़ था, जो 2023-24 में घटकर ₹35,660 करोड़ रह गया। वर्ष 2024-25 में इसके ₹29,095 करोड़ रहने का अनुमान है। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2023-24 में ₹2,833 करोड़ की राजस्व बचत हुई, जबकि 2024-25 में ₹1,121 करोड़ की राजस्व बचत का अनुमान है।
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कृषि उत्पादन में भी सुधार
आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार वर्ष 2023-24 में पिछले वर्ष की तुलना में चावल का उत्पादन 21 प्रतिशत और गेहूं का उत्पादन 10.7 प्रतिशत बढ़ा है।
सम्राट चौधरी ने क्या कहा?
आज बजट सत्र आरंभ होने पर बिहार के आर्थिक सर्वेक्षण: 2024-25 जारी करते हुए। #BudgetSession2025 #ViksITBihar pic.twitter.com/PB5WpyX5GH
— Samrat Choudhary (@samrat4bjp) February 28, 2025
सम्राट चौधरी ने कहा, “हमारी सरकार ने पहली बार वर्ष 2026-27 में बिहार आर्थिक सर्वेक्षण को सदन के पटल पर रखने की शुरुआत की थी। यह दस्तावेज राज्य के आर्थिक विकास का आईना है। आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 इस श्रृंखला का 19वां सर्वेक्षण है।”




