Patna: मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में बुधवार को हुई बिहार कैबिनेट की बैठक में सहकारिता विभाग से जुड़े तीन महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इन फैसलों से राज्य में सहकारिता व्यवस्था को मजबूत करने के साथ गन्ना किसानों, मछुआरों और कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। कैबिनेट ने मत्स्यजीवी सहकारी समितियों के लिए त्रि-स्तरीय ढांचा बनाने, सहकारी चीनी मिलों के कमांड एरिया में प्राथमिक चीनी मिल सहकारी समितियों के गठन और वित्तीय वर्ष 2026-27 में 48,200 मीट्रिक टन अतिरिक्त भंडारण क्षमता सृजित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है।
मत्स्यजीवी समितियों के लिए बनेगा त्रि-स्तरीय ढांचा
कैबिनेट ने जिला/जिला समूह/प्रमंडल स्तरीय मत्स्यजीवी सहकारी संघ और राज्य स्तरीय मत्स्यजीवी सहकारी परिसंघ के गठन को स्वीकृति दी है। इसके जरिए राज्य में मत्स्यजीवी सहकारी समितियों को एक व्यवस्थित ढांचे से जोड़ने की तैयारी है। अब तक कई मत्स्यजीवी सहकारी समितियां अलग-अलग स्तर पर काम कर रही थीं। नए ढांचे के बाद मछुआरों को मछली पालन से जुड़ी विभिन्न सुविधाओं तक बेहतर पहुंच मिलने की उम्मीद है। इस व्यवस्था के तहत प्रशिक्षण, चारा, जाल, बाजार और कोल्ड चेन जैसी सुविधाओं को मजबूत करने पर जोर रहेगा। राज्य स्तरीय परिसंघ के माध्यम से मछली उत्पादन बढ़ाने और मछुआरों को बिचौलियों पर निर्भरता से बाहर निकालने की दिशा में भी काम किया जाएगा।
गन्ना किसानों के लिए प्राथमिक सहकारी समितियां
कैबिनेट ने सहकारी चीनी मिलों के अधिसूचित आरक्षित क्षेत्र यानी कमांड एरिया के अंतर्गत प्राथमिक चीनी मिल सहकारी समिति के गठन को भी मंजूरी दी है। इससे गन्ना आपूर्ति व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने में मदद मिलेगी। नई प्राथमिक समितियों के जरिए छोटे और सीमांत गन्ना किसानों को सहकारी चीनी मिलों से सीधे जोड़ने का प्रयास होगा। इससे किसानों को गन्ना तौल, भुगतान और अनुदान से जुड़ी प्रक्रियाओं में सहूलियत मिलने की उम्मीद है। साथ ही उन्नत बीज, खाद और तकनीकी सहायता जैसी सुविधाएं भी किसानों तक पहुंचाई जा सकेंगी।
48,200 मीट्रिक टन भंडारण क्षमता बढ़ेगी
कैबिनेट ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में 48,200 मीट्रिक टन भंडारण क्षमता सृजित करने की योजना को भी मंजूरी दी है।
इसके तहत समितियों की ओर से अलग-अलग क्षमता के गोदाम बनाए जाएंगे। इनमें:
- 200 मीट्रिक टन क्षमता के गोदाम
- 500 मीट्रिक टन क्षमता के गोदाम
- 1,000 मीट्रिक टन क्षमता के गोदाम
शामिल हैं।
इस योजना के लिए 34,95,27,730 रुपये की स्वीकृति दी गई है।
50 प्रतिशत अनुदान और 50 प्रतिशत चक्रीय पूंजी
योजना के तहत समितियों को 50 प्रतिशत अनुदान और 50 प्रतिशत चक्रीय पूंजी के रूप में सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। इससे पैक्स और व्यापार मंडलों की भंडारण क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी। किसानों की उपज को उचित भंडारण सुविधा मिलने से फसल के खराब होने की संभावना कम होगी और उन्हें बाजार में बेहतर कीमत मिलने का अवसर भी मिल सकेगा।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती
कैबिनेट से मंजूर इन तीन फैसलों का सीधा असर सहकारिता, कृषि और मत्स्य क्षेत्र पर पड़ने की उम्मीद है। मत्स्यजीवी समितियों को मजबूत ढांचा मिलने, गन्ना किसानों को प्राथमिक सहकारी समितियों से जोड़ने और भंडारण क्षमता बढ़ाने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने की दिशा में मदद मिल सकती है।




