Latehar: कानून के रखवालों द्वारा ही नियमों को ताक पर रखकर एक बेबस महिला पर अत्याचार करने का मामला सामने आने के बाद लातेहार पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। जिले के हेरहंज थाना क्षेत्र अंतर्गत मेलम गांव की रहने वाली एक ग्रामीण महिला के साथ बर्बरता और गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में लेकर मारपीट करने के आरोप में पुलिस अधीक्षक (एसपी) कुमार गौरव ने कड़ा रुख अपनाया है। जांच रिपोर्ट में नियमों की गंभीर अनदेखी पाए जाने के बाद बरियातू थाना प्रभारी प्रभात दास और सिपाही मनीष कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा सोशल मीडिया पर मामले का संज्ञान लिए जाने के बाद पुलिस प्रशासन ने यह त्वरित कार्रवाई की।
बकरी चराते वक्त सादे कपड़ों में पहुंचे जवान, फिर शुरू हुआ तांडव
घटना छह अक्टूबर की बताई जा रही है। मेलम गांव की रहने वाली पीड़िता मुनिया देवी अपने दैनिक जीवन की तरह जंगल और झाड़ियों के पास बकरियां चरा रही थीं। पीड़िता के अनुसार, अचानक बरियातू थाने के कुछ पुलिसकर्मी सादे लिबास में वहां आ धमके। उन्होंने महिला को घेर लिया और सीधे तौर पर उस पर अफीम (पोस्ता) तस्करी में संलिप्त होने का गंभीर आरोप मढ़ दिया।
मुनिया देवी ने जब इसका प्रतिवाद किया और खुद को एक साधारण मवेशी चराने वाली गरीब महिला बताया, तो पुलिसकर्मियों ने कथित तौर पर उनकी एक न सुनी। आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने मौके पर ही महिला के साथ गाली-गलौज और हाथापाई शुरू कर दी। जब आसपास मौजूद अन्य ग्रामीणों ने बीच-बचाव करने की कोशिश की और पुलिसकर्मियों की इस मनमानी का विरोध किया, तो पुलिस बल महिला को जबरन गाड़ी में बैठाकर बरियातू थाने ले गया। पीड़िता का आरोप है कि थाने की चारदीवारी के भीतर भी खाकी के नशे में चूर कर्मियों ने कानून-कायदे भूलकर उसके साथ बेरहमी से मारपीट की।
सड़क से लेकर एसपी दफ्तर तक ग्रामीणों का आक्रोश
थाने में महिला पर हुए इस कथित जुल्म की खबर जैसे ही गांव में फैली, ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। घटना के विरोध में गुरुवार को बड़ी संख्या में मेलम गांव और आसपास के ग्रामीण एकजुट होकर जिला मुख्यालय पहुंचे। ग्रामीणों ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय का घेराव करते हुए जोरदार प्रदर्शन किया और दोषी पुलिसकर्मियों की तत्काल गिरफ्तारी और निलंबन की मांग उठाई।
पीड़िता मुनिया देवी के साथ एसपी कार्यालय पहुंचे ग्रामीणों के एक प्रतिनिधिमंडल ने एसपी कुमार गौरव से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात की। ग्रामीणों ने लिखित आवेदन सौंपते हुए घटना की पूरी सच्चाई बयां की और बताया कि किस तरह बिना किसी महिला पुलिसकर्मी की मौजूदगी और बिना वारंट के सादे लिबास में आई पुलिस ने एक निर्दोष महिला को प्रताड़ित किया।
जांच में खुली पुलिसिया मनमानी की पोल
ग्रामीणों की शिकायत और आरोपों की गंभीरता को देखते हुए एसपी कुमार गौरव ने तत्काल एक विशेष जांच दल का गठन किया। जांच टीम को घटनास्थल और थाने के रिकॉर्ड की बारीकी से पड़ताल करने के निर्देश दिए गए।
जांच रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि बरियातू थाना प्रभारी प्रभात दास और सिपाही मनीष कुमार ने छापेमारी, गिरफ्तारी और पूछताछ की प्रक्रिया के दौरान कानूनी प्रावधानों का घोर उल्लंघन किया था। सुप्रीम कोर्ट और मानवाधिकार आयोग के दिशा-निर्देशों के मुताबिक किसी भी महिला आरोपी या संदिग्ध से पूछताछ अथवा हिरासत के दौरान महिला पुलिसकर्मी की मौजूदगी अनिवार्य होती है, लेकिन यहां पूरी प्रक्रिया ही मनमाने ढंग से अंजाम दी गई थी। जांच रिपोर्ट सामने आते ही एसपी ने थाना प्रभारी प्रभात दास और सिपाही मनीष कुमार को निलंबित कर विभागीय जांच शुरू करने का आदेश जारी कर दिया।
मुख्यमंत्री की सख्ती के बाद तेज हुई प्रशासनिक कार्रवाई
इस मामले ने तब और बड़ा तूल पकड़ लिया जब सोशल मीडिया पर पीड़िता की आपबीती और ग्रामीणों के विरोध का वीडियो वायरल हुआ। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की नजर जैसे ही इस पर पड़ी, उन्होंने इसे अत्यंत गंभीरता से लिया।
मुख्यमंत्री ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल ‘एक्स’ पर लातेहार पुलिस और जिले के वरीय अधिकारियों को टैग करते हुए सख्त लहजे में निर्देश दिया कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और कानून का उल्लंघन करने वाले दोषियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री के सीधे हस्तक्षेप के बाद जांच की गति तेज हुई और कुछ ही घंटों के भीतर निलंबन की कार्रवाई अमल में लाई गई।




