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पश्चिम एशिया में महायुद्ध! बहरीन और कुवैत ने ईरान पर किए सीधे हमले

बहरीन और कुवैत ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर सीधे हवाई हमले शुरू कर दिए हैं। सऊदी अरब की मदद और होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव से वैश्विक ऊर्जा संकट गहराने की आशंका है।

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Dubai, UAE: पश्चिम एशिया में जारी तनाव अब एक बेहद खतरनाक और व्यापक सैन्य संघर्ष का रूप ले चुका है। ईरान द्वारा लगातार किए जा रहे हमलों के जवाब में अब खाड़ी के देश भी सीधे तौर पर इस युद्ध में कूद पड़े हैं। प्राप्त रिपोर्टों के अनुसार, बहरीन और कुवैत ने पहली बार ईरान के सैन्य ठिकानों और मिसाइल स्टोरेज डिपो पर सीधे हवाई हमले शुरू कर दिए हैं। इस सैन्य कार्रवाई में सऊदी अरब दोनों देशों को खुफिया जानकारी (इंटेलिजेंस) और रक्षात्मक एयर कवर प्रदान करके रणनीतिक मदद पहुंचा रहा है।

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खाड़ी देशों ने बदली अपनी रणनीति

अब तक खाड़ी के देश केवल आत्मरक्षा तक सीमित थे और अपनी ओर आने वाली ईरानी मिसाइलों व ड्रोन को हवा में ही नष्ट कर रहे थे। युद्ध के व्यापक रूप से फैलने के डर से ये देश अब तक सीधे हमलों से बच रहे थे। हालांकि, अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को ईरान द्वारा लगातार निशाना बनाए जाने के बाद अब रणनीति पूरी तरह बदल चुकी है। हालांकि ओमान और कतर जैसे देशों ने अभी सीधे हमले शुरू नहीं किए हैं, लेकिन बहरीन और कुवैत ने ईरान के खिलाफ पूरी तरह से मोर्चा खोल दिया है।

अमेरिकी ठिकानों और बहरीन में अलर्ट

ईरान का दावा है कि उसने कुवैत में स्थित अमेरिकी ठिकानों जैसे कैंप उडैरी, कैंप दोहा, कैंप आरिफजान और अली अल सलेम एयरबेस को निशाना बनाया है। वहीं बहरीन में भी ईरानी हमलों के खतरे को देखते हुए सायरन बज रहे हैं और नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की हिदायत दी गई है। इसके अतिरिक्त, अमेरिकी सेना द्वारा ईरान के खिलाफ लगातार 13वीं रात भी सैन्य हमले जारी रखे गए हैं।

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होर्मुज जलडमरूमध्य पर संकट और बढ़ेगा तेल का दाम

इस पूरे संघर्ष और तनाव का मुख्य केंद्र रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (होर्मुज जलडमरूमध्य) पर नियंत्रण को लेकर जारी खींचतान है। होर्मुज जलमार्ग पूरी दुनिया में कच्चे तेल और ऊर्जा आपूर्ति का सबसे अहम रास्ता माना जाता है। यदि जारी हमलों के कारण यह मार्ग पूरी तरह बाधित होता है, तो वैश्विक स्तर पर ईंधन की कीमतें बेकाबू हो सकती हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को एक बड़े संकट का सामना करना पड़ सकता है।

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