New Delhi: पंजाब और गोवा में कांग्रेस से अलग चुनाव लड़ने को लेकर आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि उनकी पार्टी विपक्ष के वोटों को विभाजित नहीं कर रही है। केजरीवाल ने दावा किया कि भाजपा से नाराज मतदाताओं का एक वर्ग कांग्रेस को वोट बिल्कुल नहीं देता, जबकि ऐसे मतदाता आम आदमी पार्टी को स्वीकार करते हैं।
‘आप’ और कांग्रेस के वोट बैंक पर तर्क
गोवा चुनाव के संदर्भ में अपनी बात रखते हुए केजरीवाल ने कहा कि यह मानना पूरी तरह गलत है कि ‘आप’ के अलग चुनाव लड़ने से केवल गैर-भाजपा वोटों का बंटवारा होगा। उनके मुताबिक, ऐसा सोचने का मतलब यह है कि ‘आप’ को सिर्फ गैर-भाजपा मतदाता ही वोट देते हैं और भाजपा का मतदाता कभी पार्टी के पक्ष में नहीं आता। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह धारणा शायद कांग्रेस के लिए सही साबित हो सकती है, लेकिन आम आदमी पार्टी के संदर्भ में यह बिल्कुल सही नहीं है।
दिल्ली और गुजरात के आंकड़ों का दिया हवाला
अपने दावों के समर्थन में केजरीवाल ने दिल्ली के चुनावी आंकड़ों का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि विधानसभा चुनाव में ‘आप’ को करीब 52 प्रतिशत वोट मिलते थे, जबकि लोकसभा चुनाव के दौरान पार्टी का वोट शेयर गिरकर लगभग 32 प्रतिशत पर आ जाता था। उनके अनुसार, लोकसभा चुनाव में ‘आप’ के जो करीब 20 प्रतिशत वोट कम होते थे, उनका बड़ा हिस्सा भाजपा की ओर चला जाता था, जबकि यही मतदाता विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी के पक्ष में मतदान करते थे।
उन्होंने जोर देकर कहा कि ये लोग कभी भी कांग्रेस को वोट नहीं देते हैं। केजरीवाल ने दावा किया कि भाजपा से असंतुष्ट मतदाताओं का समर्थन भी कांग्रेस पार्टी के पक्ष में नहीं जाता। इसके समर्थन में उन्होंने गुजरात का उदाहरण देते हुए कहा कि भाजपा के मजबूत गढ़ माने जाने वाले क्षेत्रों में भी ‘आप’ को भाजपा के पारंपरिक मतदाताओं का समर्थन मिला है। उनके मुताबिक, भाजपा का मतदाता आम आदमी पार्टी को वोट देने के लिए तैयार हो सकता है, लेकिन वह कांग्रेस को वोट नहीं देता। इसी आधार पर उन्होंने ‘आप’ पर लगने वाले ‘वोट-कटवा’ होने के आरोपों को एक गलतफहमी करार दिया है।



