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चार साल बाद पकड़ा गया अभिजीत सरकार हत्याकांड का मुख्य आरोपित

India News: कांकुड़गाछी में वर्ष 2021 में हुए भाजपा कार्यकर्ता अभिजीत सरकार की हत्या के चार साल बाद आखिरकार इस मामले का मुख्य आरोपी अरुण दे सीबीआई के हत्थे चढ़ गया है। अरुण दे की गिरफ्तारी को सीबीआई ने एक बड़ी सफलता बताया है। आरोपी

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India News: कांकुड़गाछी में वर्ष 2021 में हुए भाजपा कार्यकर्ता अभिजीत सरकार की हत्या के चार साल बाद आखिरकार इस मामले का मुख्य आरोपी अरुण दे सीबीआई के हत्थे चढ़ गया है। अरुण दे की गिरफ्तारी को सीबीआई ने एक बड़ी सफलता बताया है। आरोपी की गिरफ्तारी से पहले उसकी सूचना देने पर ₹50 हजार का इनाम भी घोषित किया गया था।

सीबीआई ने गुरुवार को एक आधिकारिक बयान में बताया कि नारकेलडांगा का निवासी अरुण दे हत्या के बाद से लगातार फरार चल रहा था। चार सालों तक उसने पहचान छुपाकर खुद को कानून की गिरफ्त से बचाए रखा, लेकिन विधानसभा चुनाव 2026 से पहले ही सीबीआई ने उसे गिरफ्तार कर लिया।

यह मामला पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2021 के बाद हुई राजनीतिक हिंसा से जुड़ा है। अभिजीत सरकार की हत्या चुनाव परिणाम आने के एक दिन बाद की गई थी। उस समय अभिजीत की उम्र लगभग 30 वर्ष थी। इस सनसनीखेज हत्या के बाद राज्य भर में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए थे।

इस मामले में पहले कुल आठ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी। इनमें से पांच आरोपितों को पहले ही गिरफ्तार कर लिया गया था, जबकि दो को बाद में नारकेलडांगा थाने की पुलिस ने पकड़ा। इसके बाद यह केस सीबीआई को सौंपा गया। मामला राजनीतिक रूप से संवेदनशील होने के कारण काफी चर्चाओं में रहा।

अभिजीत के भाई विश्वजीत सरकार लगातार सीबीआई कार्यालय जाकर जांच की प्रगति जानने की कोशिश करते रहे हैं। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के विधायक परेश पाल और स्थानीय पार्षद स्वप्न समद्दार के खिलाफ भी साजिश में शामिल होने के आरोप लगाए हैं। उनके अनुसार, हत्या की योजना इन नेताओं के इशारे पर रची गई थी।

अब अरुण दे की गिरफ्तारी से इस केस में नई उम्मीद जगी है कि शायद अभिजीत सरकार की हत्या के पीछे की पूरी सच्चाई सामने आ सके। इस गिरफ्तारी को चुनावी हिंसा में न्याय की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

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