Patna: राज्य में मत्स्य पालन को बढ़ावा देने और किसानों की आय में इजाफा करने के उद्देश्य से बिहार सरकार ‘मोती पालन’ (Pearl Farming) को बड़े पैमाने पर प्रोत्साहित कर रही है। मत्स्य प्रजाति विविधीकरण योजना के तहत इच्छुक किसानों को मोती पालन का व्यावहारिक प्रशिक्षण देने के साथ-साथ इकाई लागत पर 60 प्रतिशत तक का अनुदान (Subsidy) प्रदान किया जा रहा है, जिससे किसान मछली पालन के साथ-साथ मोती उत्पादन से अतिरिक्त कमाई कर सकें।
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शेखपुरा, छपरा, बांका और सहरसा के 89 किसानों को मिल रहा प्रशिक्षण
इसी कड़ी में शेखपुरा, छपरा, बांका और सहरसा जिलों के कुल 89 प्रशिक्षणार्थियों को मोती पालन का विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। 9 अक्टूबर से शुरू हुआ यह छह दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम मीठापुर स्थित मत्स्य विकास भवन के मत्स्य प्रशिक्षण एवं प्रसार केंद्र में आयोजित किया जा रहा है।
– इस कार्यक्रम में प्रशिक्षणार्थियों को मोती उत्पादन की आधुनिक तकनीकों से लेकर उसकी व्यावहारिक प्रक्रिया तक की बारीकी से जानकारी दी जा रही है।
– प्रशिक्षण के दौरान सीप की विभिन्न प्रजातियों, उनमें न्यूक्लियस प्रत्यारोपण (Nucleus Implantation) तथा सर्जरी की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से बताया जा रहा है।
– प्रशिक्षणार्थियों को प्रायोगिक ज्ञान देने के लिए अनुभवी मोती उत्पादक किसानों की भी मदद ली जा रही है। बक्सर के सफल मोती उत्पादक किसान धनजी कुशवाहा ने प्रशिक्षणार्थियों को मोती पालन की तकनीक का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया, जो पिछले कई वर्षों से इस क्षेत्र से जुड़े हैं और विभिन्न जिलों के किसानों को प्रशिक्षित कर रहे हैं।
– कार्यक्रम के दौरान संयुक्त मत्स्य निदेशक (प्रशिक्षण एवं प्रसार) दिलीप कुमार सिंह ने मोती उत्पादन के लिए उपयोगी सीप की प्रजातियों पर विस्तृत जानकारी दी।
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मत्स्य प्रजाति विविधीकरण योजना और अनुदान का प्रावधान
राज्य सरकार की ‘मत्स्य प्रजाति विविधीकरण योजना’ वित्तीय वर्ष 2026-27 के तहत राज्य के सभी जिलों में लागू की गई है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य देशी मछलियों की प्रजातियों का संरक्षण व संवर्द्धन करना, कुल मत्स्य उत्पादन बढ़ाना और किसानों की वार्षिक आय में वृद्धि करना है। योजना के तहत माइनर कार्प, कैटफिश, वायुश्वासी मछली, झींगा और मोती पालन जैसे नवीन विकल्पों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
– लागत और अनुदान: इस योजना के तहत मोती पालन की आधा एकड़ इकाई के लिए 2.246 लाख रुपये की लागत निर्धारित की गई है।
– निर्धारित इकाई लागत के आधार पर लाभार्थी किसानों को अधिकतम 60 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है, जबकि शेष राशि का वहन लाभार्थी स्वयं या बैंक ऋण के माध्यम से करते हैं।
सरकार के इस कदम से राज्य के किसानों के लिए आय के नए द्वार खुल रहे हैं और वे पारंपरिक खेती व मछली पालन के साथ मोती उत्पादन की आधुनिक तकनीक अपनाकर अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रहे हैं।





