Mumbai: कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, बॉन्ड यील्ड में लगातार उछाल और वैश्विक स्तर पर ब्याज दरें बढ़ने की आशंका से भारतीय शेयर बाजार में घबराहट का माहौल बना हुआ है। गुरुवार को लगातार चौथे कारोबारी सत्र में बाजार भारी गिरावट के साथ लाल निशान पर बंद हुआ। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 570.59 अंक (0.79%) गिरकर 71,909.70 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 50 भी 198.50 अंक (0.88%) की कमजोरी के साथ 22,421.95 के स्तर पर आ गया।
इंट्रा-डे में 1280 अंक तक टूटा सेंसेक्स
कारोबारी सत्र के दौरान बाजार में बिकवाली का दबाव इतना तीव्र था कि प्रमुख सूचकांक साल 2026 के नए निचले स्तर तक चले गए। सेंसेक्स दिन के उच्च स्तर 72,573 से करीब 1,280 अंक फिसलकर 71,293 के निचले स्तर तक पहुंच गया था। इसने 2 अप्रैल 2026 को बने अपने पिछले न्यूनतम स्तर (71,545) को भी तोड़ दिया। इसी तरह निफ्टी 50 में भी दिन के दौरान 394 अंकों (1.7%) की भारी गिरावट आई और यह 22,217 के निचले स्तर तक गिर गया, जबकि दिन का ऊपरी स्तर 22,611 रहा था।
ऑटो और मेटल में भारी नुकसान, आईटी ने संभाला
सेक्टरवार प्रदर्शन की बात करें तो निफ्टी ऑटो इंडेक्स 3 फीसदी से ज्यादा टूट गया। इसके अलावा मेटल, मीडिया और एफएमसीजी सेक्टरों में भी तेज बिकवाली देखी गई। निफ्टी-50 पैक में बजाज ऑटो, मारुति सुजुकी, श्रीराम फाइनेंस, टाटा स्टील, ग्रासिम इंडस्ट्रीज, आयशर मोटर्स और महिंद्रा एंड महिंद्रा के शेयर टॉप लूजर्स में शामिल रहे। इसके विपरीत, आईटी शेयरों में आई खरीदारी ने बाजार को निचले स्तरों से कुछ सहारा दिया। इंफोसिस, टीसीएस, एचडीएफसी लाइफ, एचडीएफसी बैंक, एसबीआई लाइफ और मैक्स हेल्थकेयर बढ़त के साथ बंद हुए। व्यापक बाजार में निफ्टी मिडकैप 100 में 1.01% और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 0.97% की गिरावट दर्ज की गई।
ग्लोबल दबाव और आरबीआई पॉलिसी पर टिकी नजरें
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, मौजूदा गिरावट के पीछे मुख्य रूप से वैश्विक कारण हावी हैं। कई सालों के उच्च स्तर पर पहुंची बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल की लगातार ऊंची कीमतें आर्थिक दृष्टिकोण पर दबाव बना रही हैं। घरेलू स्तर पर भी निवेशक दूसरी तिमाही (क्यू2) के कंपनियों के नतीजों और अगले सप्ताह आने वाली भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समीक्षा को लेकर सतर्क रुख अपना रहे हैं।
जानकारों का मानना है कि वैश्विक महंगाई और रुपये की स्थिति को देखते हुए केंद्रीय बैंक सख्त कदम उठा सकता है। ऐसे माहौल में विशेषज्ञों ने लंबी अवधि के निवेशकों को चुनिंदा शेयरों में धीरे-धीरे निवेश (एसआईपी मोड) करने और अल्पकालिक ट्रेडर्स को बाजार स्थिर होने तक ‘वेट एंड वॉच’ की रणनीति अपनाने की सलाह दी है।




