Patna: मखाना बिहार का सुपर फूड बनकर उभरा है और इसने वैश्विक स्तर पर अपनी एक खास पहचान बनाई है। भारत के कुल मखाना उत्पादन में अकेले बिहार की हिस्सेदारी लगभग 75% से 85-90% तक है। वहीं, बिहार का पारंपरिक सत्तू भूने हुए चने या जौ को पीसकर बनाया जाने वाला एक ऐसा सुपरफूड है, जो राज्य की संस्कृति, सेहत और खानपान की अनूठी पहचान है। यह एक ऐसा जादुई ड्रिंक है जो सिर्फ एक मिनट में बनकर तैयार हो जाता है। गर्मियों में ठंडक देने के साथ-साथ यह शरीर को पूरे दिन एनर्जेटिक और फिट रखता है। इसमें प्रोटीन और फाइबर भरपूर मात्रा में होता है, जो पेट को दुरुस्त रखता है।
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विश्व मंच पर बिहार का स्वाद और संस्कृति
BRICS Summit 2026 के Welcome Kit में शामिल बिहार का सत्तू और मिथिला का मखाना आज पूरी दुनिया के सामने बिहार की समृद्ध विरासत को प्रस्तुत कर रहा है।
यह गौरव का क्षण है बिहार के किसानों, उद्यमियों और हर उस व्यक्ति के लिए, जो इन उत्पादों से… pic.twitter.com/TtbkTp9yEt— IPRD Bihar (@IPRDBihar) September 12, 2026
बिहार का देसी सत्तू और मखाना अब सिर्फ लोकल लेवल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्लोबल स्टेज पर छा गया है। हाल ही में हुए ब्रिक्स (BRICS) समिट में दुनिया भर से आए पत्रकारों और डेलीगेट्स को जो तोहफे या किट दिए गए, उसमें बिहार के इन दोनों सुपरफूड्स को खास जगह मिली है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य विदेशी मेहमानों को भारतीय संस्कृति, विविधता और अलग-अलग राज्यों के पारंपरिक स्वादों से परिचित कराना है। इसके अलावा मिथिला पेंटिंग की गैलरी में भी विदेशी मेहमानों की काफी मौजूदगी दिखी। BRICS जैसे बड़े मंच पर ‘ब्रांड बिहार’ की इस उपस्थिति से देश की ‘लोकल टू ग्लोबल’ की सोच को और मजबूती मिल रही है।
गौरतलब है कि BRICS Summit 2026 दुनिया की प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं का 18वां शिखर सम्मेलन है, जिसकी मेजबानी इस वर्ष भारत कर रहा है। 12-13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित इस सम्मेलन में BRICS देशों के नेता और प्रतिनिधि शामिल हुए। इस अवसर पर बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी वेलकम किट में सत्तू और मखाना को शामिल किए जाने को राज्य के लिए गर्व का पल बताया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर कहा, “ग्लोबल स्टेज पर बिहार का गौरव! दिल्ली BRICS समिट के वेलकम किट में शामिल सत्तू और मखाना हमारे स्वाद, परंपरा और एंटरप्रेन्योरशिप की पहचान हैं।” उन्होंने ‘लोकल से ग्लोबल’ के विजन को आगे बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद किया।
बिहार के व्यंजन: संस्कृति और इतिहास के लेखक रविशंकर उपाध्याय कहते हैं कि ब्रिक्स सम्मेलन के राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया डेलीगेट्स के वेलकम किट में शामिल बिहार का सत्तू और मखाना हमारे स्वाद की समृद्ध परंपरा का प्रतीक है। सत्तू का उल्लेख जहां बौद्ध काल और महर्षि पाणिनि की अष्टाध्यायी यानी चौथी शताब्दी ई.पू. में आया है, वहीं मखाना भी हमारी स्वाद परंपरा में वर्षों से समाहित है। पूरी दुनिया के मखाना उत्पादन का 80% हिस्सा बिहार में होता है। उन्होंने बिहार और भारत सरकार को इस अनूठी पहल के लिए साधुवाद दिया।
किसान और व्यापारियों की जुबानी
किसी भी छोटे स्टार्टअप के लिए लोकल बाजार से निकलकर इंटरनेशनल स्तर तक अपनी पहचान बनाना आसान नहीं होता। लेकिन जब सरकार का सहयोग और सही प्लेटफॉर्म मिलता है, तो छोटे कारोबार के बड़े सपने भी हकीकत में बदलने लगते हैं। BRICS जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर इन उत्पादों की मौजूदगी बिहार के स्थानीय कारोबारियों, किसानों और उत्पादकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

सुपौल जिले के रहने वाले मनमोहन झा 10 बीघा से ज्यादा जमीन पर मखाना की खेती करते हैं। वह बताते हैं कि मखाना ने उन्हें गांव में रहने लायक बना दिया है और धान-गेहूं से इसमें काफी ज्यादा फायदा होता है। बिहार सरकार का प्रयास सराहनीय है और विदेशी मंच पर इसकी धूम उन्हें और अधिक प्रोत्साहित कर रही है। वहीं, सत्तू का लोकल व्यापार कर रहे नंदन मिश्र बताते हैं कि बिहार के हर घर में इसका उपयोग होता है और यदि यह देश के हर घर तक पहुंचे, तो किसान समृद्ध होंगे। सरकार का समर्थन ऐसे उद्यमियों के लिए बहुत बड़ा प्रोत्साहन है।

मधुबनी से शुरू हुए सत्तू के स्टार्टअप ‘Sattuz’ के संस्थापक सचिन कुमार ने BIADA और विदेश मंत्रालय का आभार जताते हुए कहा कि बिहार का पारंपरिक सत्तू अब वैश्विक मंच पर अपनी धाक जमा रहा है, जो हर बिहारी के लिए गर्व की बात है। इसके अलावा, दिल्ली में चल रहे BRICS सम्मेलन में विदेशी मेहमानों को दिए गए गिफ्ट पैक में पूर्णिया का अचारी मखाना भी शामिल किया गया है। कंपनी के हेड रवि कुमार ने बताया कि मखाना उद्योग स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर रोजगार दे रहा है, जिससे खासतौर पर महिलाओं को काफी फायदा हुआ है। मिथिला मखाना को GI टैग मिलने के बाद से इसकी पहचान देश के साथ-साथ विदेशों में भी तेजी से बढ़ रही है।




