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कंप्यूटर इतिहास का ऐतिहासिक मोड़, जब IBM ने पेश किया अपना पहला पर्सनल कंप्यूटर

जानिए 1981 में IBM PC 'Model 5150' के आगमन से कैसे बदली दुनिया की तस्वीर

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रांची: आज कंप्यूटर, लैपटॉप और स्मार्टफोन हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं, लेकिन डिजिटल क्रांति का यह सिलसिला उस वक्त सबसे बड़े ऐतिहासिक मोड़ पर पहुंचा था, जब साल 1981 में इंटरनेशनल बिजनेस मशीन्स (IBM) ने दुनिया के सामने अपना पहला ‘पर्सनल कंप्यूटर’ (IBM PC) पेश किया। 12 अगस्त 1981 को न्यूयॉर्क के प्रतिष्ठित वाल्डोर्फ एस्टोरिया होटल में लॉन्च किया गया यह कंप्यूटर (मॉडल 5150) महज एक इलेक्ट्रॉनिक मशीन नहीं था, बल्कि इसने आने वाले दशकों के लिए पूरे पर्सनल कंप्यूटिंग उद्योग का नया मानक तय किया।

1981 से पहले और बाद का कंप्यूटर दौर

1980 के दशक की शुरुआत से पहले कंप्यूटर मुख्य रूप से बड़े-बड़े कॉर्पोरेट दफ्तरों, प्रयोगशालाओं या यूनिवर्सिटी के बड़े कमरों (मेनफ्रेम और मिनी-कंप्यूटर) तक सीमित थे। हालांकि एप्पल (Apple), कमोडोर (Commodore) और अटरी (Atari) जैसी कंपनियों ने छोटे कंप्यूटर बाजार में उतारे थे, लेकिन आम जनता और कॉर्पोरेट सेक्टर के लिए कंप्यूटर अब भी एक जटिल और दूर की कौड़ी जैसा लगता था।
IBM, जिसे उस समय तक विशालकाय बिजनेस मशीनों और मेनफ्रेम कंप्यूटरों का बेताज बादशाह माना जाता था, ने महसूस किया कि भविष्य व्यक्तिगत उपयोग वाले कंप्यूटरों का ही है। इस विचार को हकीकत में बदलने के लिए कंपनी ने ‘प्रोजेक्ट चेस’ (Project Chess) नाम से एक गोपनीय मिशन शुरू किया।

12 महीनों में तैयार हुई दुनिया को बदलने वाली तकनीक

सामान्यतः IBM जैसी दिग्गज कंपनी को किसी नए उत्पाद को विकसित करने में कई सालों का समय लगता था। लेकिन प्रतिस्पर्धा को देखते हुए विलियम लोव और डॉन एस्ट्रिज के नेतृत्व में इंजीनियरों की एक खास टीम ने महज 12 महीनों के रिकॉर्ड समय में IBM PC का निर्माण कर दिखाया।
IBM ने इस प्रोजेक्ट में अपनी पारंपरिक रणनीति से हटकर एक बेहद क्रांतिकारी फैसला लिया—‘ओपन आर्किटेक्चर’ (Open Architecture) यानी बाजार में पहले से उपलब्ध पार्ट्स (Off-the-shelf components) का इस्तेमाल।

इस कंप्यूटर के मुख्य फीचर्स कुछ इस प्रकार थे:

  • प्रोसेसर: इंटेल (Intel) का 8088 माइक्रोप्रोसेसर, जो 4.77 मेगाहर्ट्ज (MHz) की स्पीड पर काम करता था।
  • मेमोरी (RAM): बेस मॉडल में 16 किलोबाइट (KB) रैम थी, जिसे 256 KB तक बढ़ाया जा सकता था।
  • ऑपरेटिंग सिस्टम: बिल गेट्स की युवा कंपनी माइक्रोसॉफ्ट द्वारा तैयार किया गया MS-DOS (जिसे IBM ने PC-DOS के रूप में पेश किया)।
  • डिस्प्ले और स्टोरेज: इसमें 5.25 इंच के दो फ्लॉपी डिस्क ड्राइव लगाने का विकल्प था। इसके साथ मोनोक्रोम या कलर डिस्प्ले एडेप्टर भी जोड़ा जा सकता था।
  • शुरुआती कीमत: इस बेसिक सिस्टम की शुरुआती कीमत लगभग $1,565 (डॉलर) रखी गई थी, जबकि मॉनिटर और फ्लॉपी ड्राइव के साथ फुल सेटअप की कीमत करीब $3,000 के आसपास पहुंचती थी।

मार्केट में जबरदस्त मांग और ‘IBM Compatible’ का दौर

जैसे ही IBM ने 1981 में अपने इस पर्सनल कंप्यूटर की घोषणा की, बाजार में इसकी अभूतपूर्व मांग पैदा हो गई। लॉन्च के कुछ ही महीनों के भीतर IBM PC दफ्तरों, बैंकों, शैक्षणिक संस्थानों और घरों में पहली पसंद बन गया। लोग बिना किसी झिझक के इस बात पर भरोसा करने लगे कि कंप्यूटर सुरक्षित, उपयोगी और भविष्य का निवेश है।
IBM के इस कदम से केवल IBM को ही फायदा नहीं हुआ, बल्कि पूरी आईटी इंडस्ट्री का कायाकल्प हो गया। IBM द्वारा अपने कंप्यूटर का आर्किटेक्चर खुला रखने के कारण अन्य कंपनियों (जैसे कॉम्पैक, डेल आदि) को ‘IBM-Compatible’ क्लोन कंप्यूटर बनाने का मौका मिला। इसी फैसले ने सॉफ्टवेयर बनाने वाली कंपनी माइक्रोसॉफ्ट और चिप बनाने वाली कंपनी इंटेल को दुनिया की सबसे शक्तिशाली टेक कंपनियों में से एक बना दिया।

डिजिटल युग की मजबूत नींव

1981 में लॉन्च हुए इस IBM PC ने आधुनिक दुनिया के काम करने के तरीके को पूरी तरह बदल दिया। टाइपिस्ट की जगह वर्ड प्रोसेसिंग ने ले ली, कागजी बही-खातों की जगह स्प्रेडशीट आ गई और डेटा प्रोसेसिंग चुटकियों का खेल बन गई।
हालांकि आज के आधुनिक लैपटॉप और स्मार्टफोन उस 1981 के IBM PC की तुलना में लाखों गुना अधिक शक्तिशाली और हल्के हैं, लेकिन इसमें कोई संदेह नहीं कि आज हम जिस डिजिटल और इंटरनेट-संचालित युग में सांस ले रहे हैं, उसकी असली नींव साल 1981 में IBM द्वारा रखे गए उसी पहले पर्सनल कंप्यूटर ने रखी थी।
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