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आरोपों का ठोस जवाब: JPSC में ईमानदारी और वित्तीय सुचिता की नई राह दिखाते डॉ. जमाल अहमद

JPSC में पारदर्शिता की अनूठी पहल, विवादों के बीच डॉ. जमाल अहमद ने सार्वजनिक की अपनी और परिवार की संपत्ति, पेश की ईमानदारी की बेमिसाल नज़ीर

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रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) अपने गठन के समय से ही विभिन्न विवादों और गड़बड़ियों के आरोपों से जूझता रहा है। ऐसे दौर में, जब आयोग की साख और कार्यशैली पर अक्सर सवाल खड़े होते रहे हैं, JPSC के सदस्य डॉ. जमाल अहमद ने एक ऐसी अनूठी पहल की है जिसने प्रशासनिक सुचिता और पारदर्शिता की नई मिसाल कायम की है। इतिहास में यह पहली बार देखा गया है कि आयोग के किसी पूर्व अथवा वर्तमान अध्यक्ष या सदस्य ने स्वतः संज्ञान लेते हुए स्वयं, अपनी पत्नी और परिवार की समस्त चल-अचल संपत्तियों व आय का विवरण सार्वजनिक हलफनामे/विज्ञप्ति के माध्यम से जनता के समक्ष रख दिया है।

राजनीतिक गलियारों में भले ही विपक्ष के नेताओं, विशेषकर बाबूलाल मरांडी द्वारा उनकी कार्यशैली और संपत्ति पर प्रश्नचिह्न लगाए जा रहे हों, लेकिन डॉ. जमाल अहमद के इस अभूतपूर्व पारदर्शी कदम ने उन तमाम अनर्गल आरोपों की हवा निकाल दी है। सार्वजनिक किए गए आधिकारिक ब्योरे के अनुसार, डॉ. अहमद ने न केवल अपने कार्यकाल बल्कि पिछले 5 वर्षों (वित्तीय वर्ष 2021-22 से 2025-26) के दौरान की पूरी संचयी आय और अर्जित संपत्तियों का पारदर्शी लेखा-जोखा देश और राज्य की जनता के सामने प्रस्तुत कर दिया है।

पारदर्शी सार्वजनिक प्रकटीकरण का ब्योरा

सार्वजनिक सूचना/प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2021-22 से 2025-26 की 5 वर्ष की अवधि में डॉ. जमाल अहमद की कुल संचयी आय ₹1,85,50,441 रही है, जबकि उनकी पत्नी डॉ. हलीमा खातून की संचयी आय ₹60,57,944 रही है। दोनों की संयुक्त 5-वर्षीय संचयी आय ₹2,46,08,385 है, जो पूरी तरह से आयकर विवरणियों (ITRs) पर आधारित और सत्यापित है।

संपत्तियों के अर्जन के विषय में स्थिति स्पष्ट करते हुए दस्तावेज़ में बताया गया है कि पिछले 5 वर्षों में JPSC सदस्य के रूप में पदभार ग्रहण करने के बाद, उन्होंने प्रमुख संपत्ति के रूप में केवल 1,596 वर्ग फुट क्षेत्रफल का एक आवासीय फ्लैट खरीदा है, जिसका घोषित मूल्य ₹87,81,280 है। इसके अलावा, उक्त 5 वर्षों में उनके द्वारा कोई भी नया वाहन, सोना या आभूषण (Gold / Jewellery) अर्जित नहीं किया गया है।

अपनी वित्तीय देनदारियों (Liabilities) का लेखा-जोखा भी उजागर करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया है कि आवासीय फ्लैट से संबंधित उनका बैंक ऋण ₹59,19,000 है। इसके साथ ही वर्ष 2016 में लिया गया ₹20,00,000 का ऋण तथा वर्ष 2023 में उनकी पत्नी द्वारा लिया गया ₹15,00,000 का ऋण बकाया देनदारियों के रूप में दर्ज है।

पैतृक संपत्ति पर स्थिति स्पष्ट

पैतृक एवं पारिवारिक पृष्ठभूमि पर स्थिति स्पष्ट करते हुए डॉ. अहमद ने जानकारी दी है कि उनके परदादा स्वर्गीय खुदा बख्श द्वारा अर्जित कुछ भू-खंड आज भी अविभाजित पारिवारिक स्वामित्व में हैं। वहीं, उनके दादा स्वर्गीय मोहम्मद इस्माइल एक सरकारी कर्मचारी थे, जिन्होंने अपने जीवनकाल में कोई संपत्ति अर्जित नहीं की। उनके पिता स्वर्गीय जमील अहमद (अधिवक्ता, हजारीबाग कोर्ट) द्वारा निर्मित दो मकान तथा कुछ भू-खंड भी वर्तमान में अविभाजित (Undivided) हैं। इन अविभाजित पैतृक संपत्तियों को उनके व्यक्तिगत अर्जन से पृथक रखा गया है ताकि वित्तीय अस्पष्टता की कोई गुंजाइश न रहे।

आरोपों की हकीकत और राज्यहित में सराहना

JPSC को अक्सर “काली कोठरी” के रूप में देखा जाता रहा है, जहाँ पारदर्शी प्रक्रिया बनाए रखना एक बड़ी चुनौती रही है। ऐसी जगह पर रहते हुए भी डॉ. जमाल अहमद बेदाग और अछूते नज़र आ रहे हैं। यदि उनके इरादे साफ न होते, तो वे अपनी तथा अपने परिवार की संपत्तियों का सार्वजनिक प्रकटीकरण कभी नहीं करते।

जब से डॉ. जमाल अहमद ने JPSC में अपना पदभार संभाला है, तब से आयोग में प्रशासनिक सुधार देखने को मिले हैं और अनुचित प्रथाओं व भ्रष्टाचार पर प्रभावी लगाम लगी है। ऐसे में पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी द्वारा उन पर लगाए जा रहे आरोप विशुद्ध रूप से राजनीति से प्रेरित प्रतीत होते हैं। जो व्यक्ति स्वयं आगे बढ़कर अपनी आय का एक-एक रुपया, बैंक ऋण और पारिवारिक पृष्ठभूमि जनता व जांच एजेंसियों के सत्यापन के लिए खुली किताब की तरह रख दे, उसकी नीयत पर सवाल उठाना तर्कसंगत नहीं है।

डॉ. जमाल अहमद जैसे निष्ठावान, पारदर्शी और साहसी व्यक्तित्व की आलोचना करने के बजाय उनकी सराहना की जानी चाहिए। प्रशासनिक व्यवस्था में भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए ऐसे अधिकारियों को मनोबल देने और राज्यहित में कार्य करने के लिए प्रोत्साहित करने की सख्त आवश्यकता है।

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