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नामकुम जमीन घोटाला: गायब सरकारी दस्तावेजों की जांच करेगी ACB, हाई कोर्ट ने दिए निर्देश

रांची: नामकुम अंचल में जमीन की खरीद-बिक्री, अवैध दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) और सरकारी राजस्व अभिलेखों (सरकारी रिकॉर्ड) के गायब होने के बहुचर्चित मामले में अब भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की जांच का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। राज्य के कैबिनेट सचिव ने मामले की

हाईकोर्ट
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रांची: नामकुम अंचल में जमीन की खरीद-बिक्री, अवैध दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) और सरकारी राजस्व अभिलेखों (सरकारी रिकॉर्ड) के गायब होने के बहुचर्चित मामले में अब भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की जांच का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। राज्य के कैबिनेट सचिव ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एसीबी को प्रारंभिक जांच (प्रिलिमिनरी इंक्वायरी – पीई) दर्ज करने की अनुमति दे दी है। झारखंड सरकार की ओर से गुरुवार को उच्च न्यायालय को इस प्रशासनिक मंजूरी की आधिकारिक जानकारी दी गई।

यह पूरा मामला झारखंड उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति राजेश शंकर की एकल पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध था। अदालत ने मामले को अत्यंत गंभीर मानते हुए एसीबी को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वह अगले चार हफ्तों के भीतर मामले की प्रारंभिक जांच दर्ज करे. साथ ही, जांच की प्रगति रिपोर्ट को एक सीलबंद लिफाफे में अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया जाए. इस मामले की अगली सुनवाई के लिए माननीय न्यायालय ने 21 अगस्त की तारीख मुकर्रर की है।

सुनवाई के दौरान न्यायालय में एसीबी का पक्ष वरिष्ठ स्थायी अधिवक्ता सुमित गाड़ोदिया ने रखा, जबकि याचिकाकर्ता थॉमस साइमन की तरफ से अधिवक्ता जे.जे. सांगा ने अदालत के समक्ष अपनी दलीलें और साक्ष्य पेश किए।

इससे पहले हुई सुनवाई में हाई कोर्ट ने राज्य के कैबिनेट सचिव को कड़े निर्देश देते हुए कहा था कि एक सप्ताह के भीतर एसीबी को जांच शुरू करने की आधिकारिक अनुमति दी जाए और इस संबंध में एक शपथ-पत्र भी कोर्ट में दाखिल किया जाए। अदालत ने चेतावनी दी थी कि न्यायिक आदेशों की अनदेखी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

यह पूरा विवाद रांची जिले के नामकुम अंचल के डुंडु (टुंडुल) क्षेत्र की जमीन से जुड़ा हुआ है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि भू-माफियाओं और अंचल कार्यालय के अधिकारियों की मिलीभगत से विवादित भूमि का गलत तरीके से दाखिल-खारिज किया गया। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि जांच के लिए जब मूल राजस्व दस्तावेजों की मांग की गई, तो अंचल कार्यालय ने महत्वपूर्ण रिकॉर्ड गायब होने की बात कही। साथ ही, प्रभावित पक्ष को म्यूटेशन की प्रमाणित प्रति देने में लगातार टालमटोल की गई। हाई कोर्ट ने इसे सरकारी रिकॉर्ड के साथ जानबूझकर की गई छेड़छाड़ मानते हुए अब जांच की पूरी कमान एसीबी को सौंप दी है.

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