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साध्वी प्रज्ञा को कोर्ट से मिली राहत, मोदी और फडणवीस सरकार पर उठे सवाल

Ranchi News : झारखंड सरकार के राज्य अल्पसंख्यक आयोग सदस्य वारिस कुरैशी ने महाराष्ट्र के चर्चित मालेगांव ब्लास्ट केस में आए कोर्ट के फैसले को न्याय से मज़ाक करार दिया है। उन्होंने कहा कि इस फैसले ने न केवल पीड़ितों के साथ अन्याय किया है

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Ranchi News : झारखंड सरकार के राज्य अल्पसंख्यक आयोग सदस्य वारिस कुरैशी ने महाराष्ट्र के चर्चित मालेगांव ब्लास्ट केस में आए कोर्ट के फैसले को न्याय से मज़ाक करार दिया है। उन्होंने कहा कि इस फैसले ने न केवल पीड़ितों के साथ अन्याय किया है बल्कि यह देश की न्याय व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है।

ज्ञात हो कि 29 सितंबर 2008 को महाराष्ट्र के मालेगांव में हुए ब्लास्ट में 6 लोगों की मौत हो गई थी और करीब 100 लोग घायल हुए थे। इस मामले में साध्वी प्रज्ञा ठाकुर, कर्नल प्रसाद पुरोहित, रमेश उपाध्याय, अजय राहिरकर, सुधाकर चतुर्वेदी, समीर कुलकर्णी और सुधाकर धर द्विवेदी समेत सात लोगों पर गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। इनमें UAPA की धारा 16, 18 और आईपीसी की धारा 120B, 302, 307, 324, 326 और 427 शामिल थीं।

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने इसी साल अप्रैल में अपनी 1500 पन्नों की अंतिम दलील में साध्वी प्रज्ञा के लिए फांसी की मांग की थी। एजेंसी का कहना था कि यह अपराध बेहद गंभीर है और इसके अनुरूप आरोपियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए। लेकिन, आज NIA स्पेशल कोर्ट ने सभी सातों आरोपियों को बरी कर दिया।

वारिस कुरैशी ने सवाल उठाया कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस इस फैसले के खिलाफ अपील करेंगे? उन्होंने याद दिलाया कि 2006 के मुंबई ट्रेन बम विस्फोट मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने सभी 12 अभियुक्तों को बरी कर दिया था, लेकिन महाराष्ट्र सरकार ने उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

उन्होंने आगे कहा कि यही NIA फिलहाल पहलगाम हमले की जांच कर रही है। अगर मालेगांव जैसे बड़े और संगीन मामले में सभी आरोपियों को बरी कर दिया जाता है, तो पहलगाम हमले के पीड़ितों को न्याय कैसे मिलेगा, यह सोचने का विषय है।

वारिस कुरैशी ने कहा कि मालेगांव ब्लास्ट में 6 निर्दोष लोगों की जान गई और 100 से अधिक लोग घायल हुए। इतने बड़े हादसे के बावजूद सभी आरोपियों को बरी करना देश में न्याय व्यवस्था पर गहरी चोट है। सरकार को तुरंत सुप्रीम कोर्ट में अपील करनी चाहिए ताकि पीड़ितों को न्याय मिल सके।

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