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105 KM पैदल कांवड़ यात्रा और शिवाभिषेक से गूंजा बिहार, जानें कहां-कहां लगी है भीड़

Bihar News: श्रावण मास की पहली सोमवारी पर पूरा बिहार भोलेनाथ की भक्ति में डूबा नजर आया। हर जिले के शिवालयों में अहले सुबह से ही श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। धनिष्ठा नक्षत्र, आयुष्मान योग और सौभाग्य योग के साथ संकष्टी गणेश चतुर्थी का शुभ

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Bihar News: श्रावण मास की पहली सोमवारी पर पूरा बिहार भोलेनाथ की भक्ति में डूबा नजर आया। हर जिले के शिवालयों में अहले सुबह से ही श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। धनिष्ठा नक्षत्र, आयुष्मान योग और सौभाग्य योग के साथ संकष्टी गणेश चतुर्थी का शुभ संयोग भक्तों के लिए खास अवसर बन गया।

सावन की इस पहली सोमवारी को लेकर भक्तों में गजब का उत्साह देखने को मिला। राजधानी पटना सहित समस्तीपुर, वैशाली, भागलपुर, मुजफ्फरपुर, दरभंगा और सहरसा के प्रमुख शिव मंदिरों में शिवलिंग पर जलाभिषेक के लिए सुबह 3-4 बजे से ही कतारें लग गईं। मंदिर प्रांगण ‘हर-हर महादेव’ और ‘बोल बम’ के नारों से गूंजने लगे।

समस्तीपुर जिले के विद्यापतिधाम स्थित प्रसिद्ध बालेश्वर स्थान शिव मंदिर में तड़के 4 बजे से जलाभिषेक शुरू हो गया। भक्तों ने जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और पुष्प चढ़ाकर भगवान शिव से मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना की। यह मंदिर मिथिलांचल के ‘देवघर’ के नाम से प्रसिद्ध है और सावन की सोमवारी पर यहां दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं।

वैशाली जिले के बाबा हरिहर नाथ मंदिर में भी भक्तों की भारी भीड़ देखी गई। मंदिर के बाहर लंबी कतारें लगी रहीं और सुरक्षा के लिए पुलिस बल की तैनाती की गई थी। भक्त गंगाजल, दूध, दही, शहद और बेलपत्र लेकर भोलेनाथ का जलाभिषेक कर रहे थे। पूरा वातावरण शिवमय हो उठा था।

भागलपुर के सुल्तानगंज में तो नजारा और भी भव्य था। यहां उत्तरवाहिनी गंगा से पवित्र जल भरने के लिए देशभर से आए कांवड़ियों का विशाल हुजूम उमड़ा। जल भरने के बाद भक्तों ने 105 किलोमीटर लंबी पैदल यात्रा की शुरुआत की, जिसका अंतिम पड़ाव है — बाबा बैद्यनाथ धाम (देवघर, झारखंड)। सुल्तानगंज से लेकर देवघर तक “बोल बम” के जयघोष गूंजते रहे।

सुरक्षा व्यवस्था की बात करें तो राज्य के सभी प्रमुख शिवालयों में पुलिस, स्वयंसेवक और नगर निगम की टीमें तैनात रहीं। कहीं भी अव्यवस्था न हो, इसके लिए स्थानीय प्रशासन दिन-रात जुटा रहा।

पंडितों के अनुसार, सावन की पहली सोमवारी अत्यंत शुभ मानी जाती है और इस दिन व्रत-पूजन करने से जीवन में सुख-शांति आती है। श्रद्धालु न सिर्फ पूजा-पाठ में लगे रहे बल्कि मंदिरों के बाहर गरीबों को भोजन और वस्त्र का दान भी किया गया।

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