रांची: राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत राशन लेने वाले अपात्र लोगों के खिलाफ झारखंड सरकार ने कार्रवाई तेज कर दी है। जांच में राज्यभर में 6,29,973 लाभुक अपात्र पाए गए हैं। इनमें से करीब 1.63 लाख लोगों के नाम राशन कार्ड से हटाए जा चुके हैं। अभी करीब 4.66 लाख मामलों में कार्रवाई बाकी है।
खाद्य आपूर्ति विभाग ने सभी जिलों के प्रशासन को अपात्र लाभुकों के खिलाफ जल्द कार्रवाई पूरी करने का निर्देश दिया है। राज्य सरकार ने इसके लिए 25 अगस्त तक की समय-सीमा तय की है। वहीं, केंद्र सरकार ने पूरी प्रक्रिया 31 अगस्त तक पूरी करने को कहा है।
रांची में सबसे ज्यादा अपात्र लाभुक
आंकड़ों के अनुसार रांची में सबसे ज्यादा 93,198 अपात्र लाभुक मिले हैं। इसके बाद रामगढ़ में 73,567, धनबाद में 67,288 और पूर्वी सिंहभूम में 58,492 लाभुक अपात्र पाए गए हैं। गिरिडीह में 53,996 और गोड्डा में 45,605 लोगों की पहचान हुई है।
सरकारी कर्मचारी और आयकरदाता भी शामिल
जांच में 1,272 सरकारी कर्मचारी, 1,84,810 आयकरदाता और 15,493 बड़े कारोबारी राशन योजना का लाभ लेते मिले हैं। इसके अलावा 13,087 कंपनी मालिक, 21,442 चारपहिया वाहन मालिक और 1,10,142 डुप्लीकेट राशन कार्डधारकों की भी पहचान हुई है। छह महीने या उससे अधिक समय से राशन नहीं लेने वाले 1,77,751 लाभुक भी अपात्र श्रेणी में पाए गए हैं।
डिजिटल डाटा से हो रही जांच
अपात्र लाभुकों की पहचान के लिए केंद्र और राज्य सरकार के डिजिटल डाटा का मिलान किया जा रहा है। इसी प्रक्रिया के तहत सरकारी कर्मचारी, आयकरदाता, वाहन मालिक और डुप्लीकेट राशन कार्डधारकों की पहचान की गई है।
सरकार का कहना है कि इस कार्रवाई का उद्देश्य अपात्र लोगों को राशन व्यवस्था से हटाकर सरकारी खाद्यान्न का लाभ वास्तविक जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचाना है।




