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आग, हादसे और इमरजेंसी से बचाव के गुर, 430 पायलट हुए प्रशिक्षित

Jamshedpur news: टाटानगर स्थित इलेक्ट्रिक लोको पायलट प्रशिक्षण केंद्र में गुरुवार को रेल सिविल डिफेंस की ओर से व्यापक आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस विशेष सत्र का उद्देश्य नव नियुक्त और सेवारत लोको पायलटों को आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित, समन्वित और सुरक्षित

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Jamshedpur news: टाटानगर स्थित इलेक्ट्रिक लोको पायलट प्रशिक्षण केंद्र में गुरुवार को रेल सिविल डिफेंस की ओर से व्यापक आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस विशेष सत्र का उद्देश्य नव नियुक्त और सेवारत लोको पायलटों को आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित, समन्वित और सुरक्षित कार्रवाई के लिए तैयार करना था।

प्रशिक्षण में रेलवे भर्ती बोर्ड से हाल ही में चयनित सहायक लोको पायलटों के साथ रिफ्रेशर कोर्स कर रहे अनुभवी लोको पायलटों ने भाग लिया। कार्यक्रम की शुरुआत प्रार्थना सभा से हुई, जिसके बाद सिविल डिफेंस इंस्पेक्टर एवं राष्ट्रपति सम्मानित सदस्य संतोष कुमार ने ट्रेन में आग लगने की संभावित परिस्थितियों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यात्रियों द्वारा ज्वलनशील पदार्थों का अवैध रूप से ले जाना, पैंट्री कार में गैस रिसाव, विद्युत तंत्र की अनदेखी, शॉर्ट सर्किट, खुले तार, ट्रेक्शन यूनिट की खराबी और लोकोमोटिव में तकनीकी दोष जैसी वजहें गंभीर हादसों को जन्म दे सकती हैं।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इंजन में आग लगने की घटनाएं प्रायः रखरखाव में कमी, सुरक्षा उपकरणों की अनुपलब्धता और केबलिंग की अव्यवस्था के कारण होती हैं। ऐसी स्थिति में लोको पायलट की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। संतोष कुमार ने समझाया कि आपदा की स्थिति में ट्रेन को सुरक्षित स्थान पर रोकना, फ्लैशर लाइट चालू करना, यात्रियों को व्यवस्थित ढंग से बाहर निकालना, स्टेशन मास्टर को तुरंत सूचना देना तथा प्रभावित कोच को अन्य डिब्बों से कम से कम 45 मीटर दूर अलग करना आवश्यक कदम हैं। साथ ही ट्रेन को अनियंत्रित होकर आगे बढ़ने से रोकने और उपलब्ध संसाधनों से प्रारंभिक स्तर पर आग बुझाने के उपायों पर भी विस्तार से चर्चा की गई।

कार्यक्रम के दौरान इंजन, ब्रेक वैन, एसी कोच, पैंट्री कार और जनरेटर कार में लगे अग्निशामक यंत्रों के सही उपयोग का व्यवहारिक प्रदर्शन कराया गया। प्रतिभागियों को ‘रूल ऑफ नाइन’ के माध्यम से जलन की गंभीरता का आकलन, ‘ट्राई एज’ पद्धति से घायलों की प्राथमिकता तय करना, ‘स्टॉप-ड्रॉप-एंड-रोल’ तकनीक और धुएं से भरे इंजन से सुरक्षित बाहर निकलने के उपायों का प्रशिक्षण दिया गया।

दूसरे सत्र में डेमोंस्ट्रेटर शंकर कुमार प्रसाद ने अग्निशामक यंत्रों के प्रभावी इस्तेमाल और सीपीआर देने की विधि का प्रदर्शन किया, जबकि अनामिका मंडल ने प्राथमिक उपचार, घाव की सफाई और बैंडेज लगाने की सही प्रक्रिया समझाई।

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में रांची, कोलकाता और मालदा से चयनित सहायक लोको पायलटों सहित आरआरसी बैच के कुल 430 प्रशिक्षणार्थियों ने भाग लिया। सत्र के अंत में प्रतिभागियों ने कहा कि यह प्रशिक्षण उनके लिए अत्यंत उपयोगी और व्यावहारिक रहा, जिससे वे किसी भी आपात स्थिति में अधिक सजग और सक्षम होकर अपनी जिम्मेदारी निभा सकेंगे।

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