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सुकमा में नक्सलियों का ‘महा-सरेंडर’: 64 लाख के इनामी 26 कैडरों ने छोड़ी गन

India News: छत्तीसगढ़ के धुर नक्सल प्रभावित सुकमा जिले से लाल आतंक के खात्मे की दिशा में एक बड़ी खबर सामने आई है। सुकमा में माओवाद का ‘सरेंडर’ काल; 26 नक्सलियों ने डाली हथियार, 64 लाख के इनामियों ने बदला रास्ता! बुधवार को सुकमा पुलिस

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India News: छत्तीसगढ़ के धुर नक्सल प्रभावित सुकमा जिले से लाल आतंक के खात्मे की दिशा में एक बड़ी खबर सामने आई है।

सुकमा में माओवाद का ‘सरेंडर’ काल; 26 नक्सलियों ने डाली हथियार, 64 लाख के इनामियों ने बदला रास्ता!

बुधवार को सुकमा पुलिस और सुरक्षाबलों के बढ़ते दबाव और सरकार की नई पुनर्वास नीति का असर दिखा, जब 7 महिला माओवादियों सहित कुल 26 नक्सली कैडरों ने एक साथ आत्मसमर्पण कर दिया। रक्षित आरक्षी केंद्र में आयोजित इस कार्यक्रम में पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण के सामने नक्सलियों ने अपनी बंदूकों को त्यागकर मुख्यधारा में शामिल होने की शपथ ली।

‘पूना मार्गेम’ का असर, 64 लाख की इनामी फौज ढह गई

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, आत्मसमर्पण करने वाले इन नक्सलियों पर कुल मिलाकर 64 लाख रुपये का इनाम घोषित था। यह बड़ी सफलता छत्तीसगढ़ सरकार की ‘नक्सलवादी आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति-2025’ और सुकमा पुलिस के विशेष ‘पूना मार्गेम’ (नया रास्ता) अभियान का परिणाम है। अंदरूनी इलाकों में नए सुरक्षा कैंपों की स्थापना और लगातार जारी सर्च ऑपरेशन ने माओवादियों के सप्लाई चेन और रसद को पूरी तरह तोड़ दिया है, जिससे तंग आकर कैडर अब जंगलों से बाहर आ रहे हैं।

10 लाख की इनामी लाली समेत कई खूंखार कमांडर शामिल

सरेंडर करने वालों में सबसे बड़ा नाम लाली उर्फ मुचाकी आयते का है। लाली प्लाटून डिप्टी कमांडर के पद पर सक्रिय थी और उस पर अकेले 10 लाख रुपये का इनाम था। इसके अलावा सरेंडर करने वालों में सेंट्रल कमेटी और डिवीजनल कमेटी के कई अहम सदस्य (CYPCM, PPCM, ACM) शामिल हैं। ये सभी सुरक्षाबलों पर घात लगाकर हमला करने, आईईडी धमाकों और बस्तर की सड़कों को लहूलुहान करने की घटनाओं में शामिल रहे हैं। हेमला लखमा और आसमिता जैसे युवा कैडरों ने भी अब हिंसा को अलविदा कह दिया है।

पुनर्वास और नई शुरुआत का संकल्प

सरकार की नीति के तहत इन सभी को तत्काल 50-50 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि और उनके घोषित इनाम की राशि प्रदान की जाएगी। सुकमा एसपी किरण चव्हाण ने कहा कि डीआरजी, सीआरपीएफ और कोबरा की साझा कोशिशों से आज बस्तर का परिदृश्य बदल रहा है। उन्होंने बाकी बचे नक्सलियों से भी अपील की है कि वे हिंसा का रास्ता छोड़ें और सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाकर समाज के निर्माण में योगदान दें।

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