नई दिल्ली: अमेरिका में 11 सितंबर 2001 को हुए आतंकी हमले की आज 25वीं बरसी है। इस हमले में आतंकियों ने चार यात्री विमानों को हाईजैक किया था। इनमें से दो विमानों को न्यूयॉर्क के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर की जुड़वां इमारतों से टकराया गया, जबकि एक विमान पेंटागन से टकराया था। इस हमले में हजारों लोगों की जान गई थी।
हमले के बाद अमेरिका ने अपनी सुरक्षा और रक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव किए। तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुश ने आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक अभियान शुरू किया और अफगानिस्तान में सैन्य कार्रवाई की गई।
होमलैंड सिक्योरिटी विभाग बना
अमेरिका ने आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए होमलैंड सिक्योरिटी विभाग (DHS) बनाया। इसमें कई सरकारी एजेंसियों को एक साथ लाया गया, ताकि आतंकवाद से जुड़ी सूचनाओं का बेहतर तरीके से आदान-प्रदान हो सके।
पेट्रियट एक्ट से बढ़े सुरक्षा अधिकार
9/11 के बाद अमेरिका ने यूएसए पेट्रियट एक्ट लागू किया। इसके तहत सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों को संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी और जानकारी साझा करने के लिए ज्यादा अधिकार दिए गए। आतंकवाद की फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग पर भी सख्ती बढ़ाई गई।
एयरपोर्ट की सुरक्षा हुई मजबूत
विमान यात्रियों की सुरक्षा के लिए ट्रांसपोर्टेशन सिक्योरिटी एडमिनिस्ट्रेशन (TSA) बनाया गया। एयरपोर्ट पर यात्रियों और सामान की जांच को कड़ा किया गया। विमानों के कॉकपिट के दरवाजों को भी ज्यादा सुरक्षित बनाया गया।
भारत के लिए भी अहम सबक
9/11 के बाद अमेरिका की सुरक्षा व्यवस्था में हुए बदलाव भारत के लिए भी महत्वपूर्ण माने जाते हैं। आतंकवाद से निपटने के लिए खुफिया एजेंसियों के बीच तेजी से सूचना साझा करना, आतंकी फंडिंग पर नजर रखना, ऑनलाइन कट्टरपंथ को रोकना और केंद्र-राज्य एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है।




