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Home»#Trending»पैर फ्रैक्चर के इलाज के दौरान युवक की मौत, 22 लाख का बिल, CM ने दिए जांच के आदेश
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पैर फ्रैक्चर के इलाज के दौरान युवक की मौत, 22 लाख का बिल, CM ने दिए जांच के आदेश

By Muzaffar HussainJuly 4, 20264 Mins Read
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रांची: राजधानी रांची के मेन रोड स्थित निजी राज अस्पताल में इलाज के दौरान एक 18 वर्षीय युवक की मौत के बाद भारी बवाल खड़ा हो गया है। मृतक के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर इलाज में घोर लापरवाही बरतने के गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजनों का गुस्सा तब और बढ़ गया जब युवक की मौत के बाद अस्पताल प्रबंधन द्वारा उन्हें कथित तौर पर 22 लाख रुपये का भारी-भरकम बिल थमा दिया गया। इस पूरे संवेदनशील मामले पर सूबे के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने कड़ा संज्ञान लिया है और मामले की उच्चस्तरीय जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।

मामूली चोट से मौत तक का दर्दनाक सफर

प्राप्त जानकारी के अनुसार, लातेहार जिले का रहने वाला 18 वर्षीय राजू कुमार रंजन बीते 24 मई को एक सड़क दुर्घटना में घायल हो गया था। इस हादसे में उसके पैर में फ्रैक्चर हुआ था। बेहतर इलाज की उम्मीद में परिजनों ने उसे रांची के राज अस्पताल में भर्ती कराया था। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल के डॉक्टरों और स्टाफ ने इलाज के दौरान आवश्यक चिकित्सकीय सावधानियां बिल्कुल नहीं बरतीं। उनका कहना है कि पैर में घाव होने के बावजूद दो से तीन दिनों तक उसकी नियमित ड्रेसिंग नहीं की गई। समय पर साफ-सफाई न होने के कारण घाव में संक्रमण (इन्फेक्शन) तेजी से फैल गया, जिससे राजू की हालत लगातार बिगड़ती चली गई।

संक्रमण जब बेहद गंभीर और जानलेवा स्तर पर पहुंच गया, तब आनन-फानन में राजू को आईसीयू (ICU) में शिफ्ट किया गया। लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी और डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बाद भी उसे बचाया नहीं जा सका। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और वे एक ही सवाल पूछ रहे हैं कि जब चोट सिर्फ पैर में थी, तो अस्पताल की कैसी देखरेख थी कि संक्रमण पूरे शरीर में फैल गया और उनके बच्चे की जान चली गई?

22 लाख का बिल और अस्पताल में हंगामा

राजू की मौत के बाद जैसे ही अस्पताल प्रबंधन ने परिजनों को 22 लाख रुपये का बकाया बिल थमाया, वैसे ही परिजनों के सब्र का बांध टूट गया। पीड़ित परिवार और उनके शुभचिंतकों ने अस्पताल परिसर में ही डॉक्टरों और प्रबंधन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन और नारेबाजी शुरू कर दी। परिजनों के आग्रह और मामले की गंभीरता को देखते हुए राजू के शव का पोस्टमार्टम राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (RIMS) में कराया गया है, ताकि मौत के सही कारणों का पता चल सके। इस पूरे विवाद पर फिलहाल अस्पताल प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक सफाई या बयान सामने नहीं आया है।

मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री ने लिया कड़ा संज्ञान

मामला सोशल मीडिया के जरिए सरकार तक पहुंचा। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर मामले का संज्ञान लेते हुए रांची के उपायुक्त (DC) मंजूनाथ भजंत्री को पूरे प्रकरण की गहन, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा है कि यदि अस्पताल दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

सीएम के आदेश के बाद रांची जिला प्रशासन तुरंत रेस हो गया है। उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री ने सिविल सर्जन को जांच का जिम्मा सौंपते हुए एक जिला स्तरीय विशेष जांच टीम (SIT) का गठन कर दिया है। यह टीम अस्पताल के सभी मेडिकल दस्तावेजों, इलाज की कड़ियों और ट्रीटमेंट चार्ट की बारीकी से जांच करेगी।

दूसरी ओर, राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने भी इस घटना पर गहरा दुख और आक्रोश जताया है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार को पत्र लिखकर एक उच्चस्तरीय कमेटी बनाने और समयबद्ध जांच पूरी करने को कहा है। स्वास्थ्य मंत्री ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी है कि मरीजों की सुरक्षा और गरिमा के साथ खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि इलाज में लापरवाही की बात सच साबित होती है, तो दोषियों का लाइसेंस रद्द करने तक की कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल, पूरे सूबे की नजरें प्रशासन की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं।

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